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​खालवा : एसडीओ ने तीन ट्रॉली सागौन पकड़ी थी, नाकेदार को डिपो भेजने को कहा, उसने एक ही भेजी

अपने साथी के बाड़े में छिपा दी दो ट्रॉली सागौन, ढाई माह बाद रेंजर ने बाड़े से निकलवाई, नाकेदार पर होगी कार्रवाई

dainikbhaskar.com | Last Modified - Aug 12, 2018, 12:18 PM IST

​खालवा : एसडीओ ने तीन ट्रॉली सागौन पकड़ी थी, नाकेदार को डिपो भेजने को कहा, उसने एक ही भेजी

खालवा. खंडवा के खालवा ब्लाक के वनग्राम चिमईपुर के जंगल में निरीक्षण के दौरान एसडीओ को बड़ी मात्रा में सागौन लकड़ी कटी हुई मिली थी। उन्होंने नाकेदार को यह सौगान डिपो भेजने के निर्देश दिए थे। लकड़ी करीब तीन ट्रॉली थी। कुछ दिन तक लकड़ी नहीं पहुंची तो एसडीओ ने फिर निर्देश जारी किए। इस पर नाकेदार ने एक ट्रॉली लकड़ी डिपो भेज दी और दो ट्रॉली अपने साथी के बाड़े में छिपाकर रख दी। सूचना मिलने पर मीडिया गांव पहुंचा तो नाकेदार बहाना कर भाग निकला और मोबाइल भी बंद कर लिया। देर शाम रेंजर ने गांव पहुंचकर दो ट्राली लकड़ी डिपो भिजवाने का इंतजाम किया। नाकेदार पर भी कार्रवाई की बात कही है।


एसडीओ (वन) महेंद्रसिंह सोलंकी ने मई में चिमईपुर जंगल का निरीक्षण किया था। इस दौरान जंगल में करीब तीन ट्रॉली सागौन लकड़ी कटी हुई पाई गई थी। उन्होंने नाकेदार प्रेमनारायण अहिरवार को यह लकड़ी आशापुर डिपो भेजने के निर्देश दिए थे। लेकिन उसने यह लकड़ी अपने खास साथी घासी के बाड़े में छिपाकर रख दी। वे यह कीमती सागौन लकड़ी रफा-दफा (बेचना) करना चाहते थे।


मीडिया को सूचना मिली तो कुछ लोग चिमईपुर पहुंचे। नाकेदार से पूछताछ शुरू की तो वह बहाना बनाकर चला गया। मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिया। शाम तक वापस नहीं आया। मीडिया ने एसडीओ सोलंकी को सारा घटनाक्रम बताया। उन्होंने डिप्टी रेंजर पवार को घासी के घर भेजा लेकिन उसने घुसने नहीं दिया। इसके बाद देर शाम रेंजर अभय सिंह भूरिया पहुंचे। उन्होंने घासी के बाड़े में छिपी लकडिय़ां देखी और डिप्टी रेंजर को शनिवार सुबह डिपो भेजने के निर्देश दिए। शनिवार सुबह यह सागौन लकड़ी वन नाके भेजी गई। कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि रात में इसमें से भी कुछ सागौन रफा-दफा कर दी गई है।


तीन माह बाद की मार्किंग
नियमानुसार बीट चेकिंग के दौरान जब भी लकड़ी मिलती है उसका पीओआर काट कर तत्काल मार्किंग कर उसे डिपो भेजा जाता है। लेकिन इस लकड़ी में मार्किंग भी 3 माह बाद शनिवार को की गई है। इससे यह सिद्ध हो रहा है कि नाकेदार का इस लकड़ी को डिपो भेजने का कोई इरादा नहीं था। नाकेदार ने ही यह लकड़ी अवैध रूप से संग्रहित कर रखी थी।


कार्रवाई की अनुशंसा की है
चिमईपुर में घासी के घर से सागौन लकड़ी उठवा ली है। सरकारी लकड़ी डिपो या नाके के अलावा किसी निजी स्थान पर नहीं रखी जा सकती। नाकेदार पर कार्रवाई की अनुशंसा की है। -अभय सिंह भूरिया, रेंजर, खालवा

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