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फैसला / दुष्कर्म के आरोप में जेल में रहे युवक-युवती, पीड़िता के बच्चे की डीएनए रिपोर्ट नेगेटिव आई, कोर्ट ने किया दोषमुक्त



Court acquits young man
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Court acquits young man
  • एनएचडीसी कर्मी पर नाबालिग ने लगाया था दुष्कर्म व सहेली पर सहयोग करने का आरोप
  • दोषमुक्त होते ही बोले- इज्जत व नौकरी की भरपाई कौन करेगा

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 10:06 AM IST

खंडवा. एनएचडीसी के कर्मचारी को दुष्कर्म व लैंगिक अपराध के मामले में कोर्ट ने बरी कर दिया है। बालिका की शिकायत पर कर्मचारी का सहयोग करने के मामले में कॉलेज की एक छात्रा को भी पुलिस ने आरोपी बनाया था। दुष्कर्म पीड़िता ने जिस बालिका को जन्म दिया उसका डीएनए आरोपी युवक से मिलान नहीं हो पाया।

बरी होने पर छात्रा खूब रोई

  1. मामले में आरोपी युवक 6 माह जेल में रहा उसे एनएचडीसी ने नौकरी से भी निकाल दिया। वहीं सहयोगी कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्रा है। बरी होने पर छात्रा खूब रोई। उसने कहा हमारे साथ जो हुआ उसकी भरपाई कौन करेगा। युवक ने कहा मेरी तो नौकरी भी चली गई। जो दोषी है पुलिस को उसे पकड़ना चाहिए।

  2. बरी होने पर युवक-युवती ने कहा हमें भरोसा था कि हम एक दिन बरी होंगे, क्योंकि यह अपराध हमने किया ही नहीं था। युवक ने कहा प्रकरण दर्ज होने के बाद आत्महत्या करने का मन बना लिया था, लेकिन परिवार के कारण कदम रुक गए। वहीं युवती भी मामले के बाद से डिप्रेशन में आ गई थी।

  3. आरोपियों के वकील वीरेंद्र वर्मा के मुताबिक 22 अगस्त 17 को थाना नर्मदानगर में 15 साल की बालिका ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके साथ नौ माह पहले उसकी सहेली सुरभि ने चाचा के घर के अंदर बंद कर दिया। जहां आरोपी हेमू उर्फ हेमंत पिता कैलाश (25) पुनासा डेम पहले से मौजूद था। उसने जबरदस्ती कर ज्यादती की।

     

    • हेमू ने धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो तुझे जान से मार दूंगा। आठ माह बाद पेट दर्द होने लगा। तब मां और पिता को आरोपी हेमू के बारे में बताया। नर्मदानगर पुलिस ने बालिका के बयान के बाद हेमू और सुरभि के खिलाफ धारा 343, 376, 506, 34, 5/6 लैंगिक अपराधों से बालकाें का संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज गिरफ्तार कर लिया। बालिका ने एक बच्चे को भी जन्म दिया।

  4. यह लिखा कोर्ट ने

    अदालत ने लिखा कि पीड़िता से अभियुक्त के शारीरिक संसर्ग से गर्भवती होना तथा पुत्री का जन्म होना कथित किया है। जिस प्रकार से डीएनए रिपोर्ट प्रदर्श पी 26 से उसका समर्थन नहीं हुआ है, वह पीड़िता का साक्ष्य की सभी अधि संभाव्यताओं को समाप्त करता है तथा उसकी साक्ष्य अविश्वसनीय रहती है, जिसके आधार पर आरोपी के विरुद्ध घटना कारित करने के संबंध में निष्कर्ष अभिलिखित नहीं किया जा सकता है।

  5. टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद जमानत

    आरोपी के वकील वर्मा ने बताया गिरफ्तारी के बाद बालिका से जन्मे बच्चे का आरोपी हेमंत से डीएनए टेस्ट कराया गया। डीएनए रिपोर्ट प्रदर्श पी 26 से इस तथ्य की पुष्ट नहीं हुई कि बच्चा हेमंत का है। इस आधार पर हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा कर दिया।

    प्रकरण के समय मैं थाना इंचार्ज नहीं था। अगर शिकायत मिली तो मामले में दोबारा जांच करेंगे। फिलहाल इस प्रकरण के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।

    हीरालाल चौहान, थाना प्रभारी, नर्मदानगर

     

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