पालकी यात्रा / तीन साल पहले कहा था, मेरी माैत दशमी के दिन 9.09 बजे हाेगी, वही हुआ, 25 गांव के लाेग पहुंचे दर्शन करने



भक्ताें ने गांव में संत की पालकी यात्रा निकाली अाैर समाधि स्थल ले गए। इनसेट - संत राजाराम पटेल  भक्ताें ने गांव में संत की पालकी यात्रा निकाली अाैर समाधि स्थल ले गए। इनसेट - संत राजाराम पटेल 
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भक्ताें ने गांव में संत की पालकी यात्रा निकाली अाैर समाधि स्थल ले गए। इनसेट - संत राजाराम पटेल भक्ताें ने गांव में संत की पालकी यात्रा निकाली अाैर समाधि स्थल ले गए। इनसेट - संत राजाराम पटेल 

  • आस्था ग्राम टिगरियां के राजाराम पटेल काे था देवी का ईष्ट, उनकी इच्छानुसार माैत के बाद गांव में बनाई समाधि 
     

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 10:33 AM IST

खंडवा. बिजासन देवी के उपासक व ईष्ट प्राप्त संत ने तीन साल पहले भक्ताें व परिजनाें काे अपनी माैत का दिन दशमी व समय सुबह 9 बजकर 9 मिनट बता दिया था। हुआ भी वही। परिजन व भक्ताें ने शाेक की बजाए संत की इच्छा अनुसार रातभर भजन किए, दूसरे दिन सेज की जगह पर पालकी सजाई और पूरे गांव में पालकी निकाली। पालकी सीधे गांव में ही संत के खेत ले गए। जहां उनकी समाधि बनाई। पालकी यात्रा में दाे दर्जन गांव के करीब तीन हजार लाेग शामिल हुए। 

 

खंडवा से सात किमी दूर बसे ग्राम टिगरियांव निवासी राजाराम पटेल (87) की रविवार सुबह दशमी के दिन 9 बजकर 9 मिनट पर माैत हाे गर्इ। भक्त जय पटेल ने बताया राजाराम पटेल काे देवी मां का ईष्ट प्राप्त था। पटेल समाज के अलावा 25 गांव के करीब पांच हजार लाेग उनके अनुयायी थे। उन्हाेंने तीन साल पहले बैठक के दाैरान कहा था कि चैत्र शुक्ल की दशमी के दिन सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर वे आत्मा से परमात्मा में विलिन हाे जाएंगे।

 

उनकी माैत की खबर सुनकर आसपास के करीब 25 गांवाें के पटेल समाज सहित अन्य समाज के लाेग रविवार काे ही टिगरियांव पहुंच गए। संत की इच्छा अनुसार भक्ताें ने रातभर उनके शव के सामने संत सिंगाजी के भजन गाए। साेमवार सुबह बड़ी तादाद में भक्ताें ने पूरे गांव में गाजे-बाजे के साथ उनकी पालकी निकाली और समाधि स्थल तक ले गए। यहां पर सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर काे समाधिस्थ किया गया। 

 

परेशानियां लेकर आते थे भक्त : भक्ताें के मुताबिक संत राजाराम के भक्त नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि सहित अष्टमी व नवमीं पर बैठक के दाैरान उनके सामने पारिवारिक व अन्य परेशानियां लेकर अाते थे। भक्ताें काे उनके ऊपर भराेसा भी था, वे बैठक के दाैरान जाे कह देते वह काम पूरा हाे जाता था। 

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