शहीदों को नमन / बाइक से 5500 किमी सफर कर कारगिल पहुंचा शहर का युवक, किया शहीदों को नमन



भूषण मराठा भूषण मराठा
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भूषण मराठाभूषण मराठा

  • टाइगर और तोलोलिंग हील निहारे, मई से जुलाई के बीच ही हुआ था कारगिल युद्ध 

Dainik Bhaskar

Jul 10, 2019, 10:20 PM IST

बुरहानपुर. भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों को नमन करने युवक युद्ध स्थल पहुंचा। युवक ने 5500 किमी का सफर बाइक से तय किया। 1999 में मई से जुलाई के बीच ही भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था। इसमें देश के जवानों ने अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हुए देश को विजय दिलाई थी। इस दौरान टाइगर और तोलोलिंग हील भी युवक ने देखे। इन दोनों पहाड़ियों पर युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना ने कब्जा किया था। 

संजयनगर निवासी भूषण मराठा जिले से 25 जून को कारगिल के लिए निकले थे। भूषण ने बताया वर्ष 1999 में मई से जुलाई माह के बीच कारगिल का युद्ध हुआ था। इस दौरान शहीद हुए देश के जवानों को नमन करने वह निकले थे। भारत मां की रक्षा में हजारों सैनिकों ने प्राण त्याग दिए। कारगिल युद्ध में टाइगर और तोलोलिंग हील पर पाकिस्तान का कब्जा होने के बाद युद्ध में शहीद जवानों के स्मारक इन दोनों हीलों के बीच बनाए गए हैं। भूषण ने इन स्मारकों पर जाकर शहीदों को नमन किया। 

लद्दाख में दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल मार्ग खारदुंग ला पहाड़ी पर तिरंगा लहराया

भूषण ने दुनिया के सबसे ऊंचे खारदुंग ला पहाड़ी पर जाकर तिरंगा लहराया। खारदुंग ला की ऊंर्चाइ 5 हजार 602 मीटर है। यह दुनिया के सबसे दुर्गम और ऊंचे पहाड़ी मार्ग में है। लद्दाख सीमा का यह रास्ता राजधानी लेह के उत्तर दिशा में है, जो श्योक और नुब्रा पहाड़ी इलाक़ों का द्वार भी है। इसके उत्तरार्द्ध में सियाचिन ग्लेशियर स्थित है। वर्ष 1976 में बनाए गए इस पास को वर्ष 1988 में आम लोगों के लिए खोला गया। तब से कई गाड़ियों, मोटरसाइकिल, पहाड़ी बाइकिंग की रैलियों को यहां से गुज़रते हुए देखा जा सकता है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन की देखरेख में यह पास भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस पास के जरिए ही सियाचिन ग्लेशियर तक सामानों को ले जाया जाता है।

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