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जूनापानी ब्लास्ट / आरोपियों के पास न तो जिलेटिन छड़ बेचने का लाइसेंस न विस्फोट की अनुमति



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khandwa news junapani blast accused doesnot have license to sell gelatin rods nor permission to blast

  • खालवा के गांव, गलियों में आसानी से मिल जाती है जिलेटिन, ग्रामीणों के लिए खिलौना बनी प्रतिबंधित छड़ें

Dainik Bhaskar

Feb 19, 2019, 11:19 AM IST

खंडवा. खालवा के जूनापानी में जिलेटिन की छड़ से हुए विस्फोट में दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए, एक की आखों की रोशनी चली गई। उसे गंभीर हालत में इंदौर रैफर किया है। मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपी फरार है, जो घटना के पहले से राजस्थान गया हुआ है। पकड़े गए आरोपियों के पास न तो जिलेटिन बेचने का लाइसेंस है, न ही विस्फोट करने का। क्षेत्र में पहले भी हजारों जिलेटिन रॉड पकड़ी जा चुकी है। बावजूद इसके इस अवैध कारोबार पर पुलिस का ध्यान नहीं था।

 

मुख्य आरोपी पवन शर्मा जो कि राजस्थान का रहने वाला है, अवैध रूप से जिलेटिन सप्लायर करने वाला क्षेत्र का एकमात्र डीलर है। पहले इसके पिता के नाम का लाइसेंस था। पिता की मौत के बाद पवन अवैध रूप से जिलेटिन छड़ों का काम कर रहा था। जबकि उसका साथी चंदन शर्मा विस्फोट का काम करता है। चंदन के पास भी लाइसेंस नहीं है।

 

खास बात यह है कि जिस कुएं में आरोपियों ने ब्लास्ट किया उसके लिए भी पंचायत से अनुमति नहीं ली। इसलिए पुलिस ने खेत मालिक किशन केडे पिता रायसिंह और बद्री पिता पन्नालाल कोरकू को भी मामले में आरोपी बनाया। आरोपियों पर धारा 387, 337 व 4/5 विस्फोटक अधिनियम के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया। आरोपियों को सोमवार दोपहर न्यायालय में पेश किया यहां से भी को जेल भेज दिया। खालवा थाना प्रभारी पीवी सिंह बताया जिलेटिन छड़ बेचने वाला आरोपी पवन शर्मा फरार है, उस पर भी केस दर्ज किया है।  


मेरे बेटे की आंखों की रोशनी कौन लौटाएगा? : विस्फोट में आखों की रोशनी गंवा चुके अजय (10) के पिता रामअवतार ने कहा बच्चों ने नादानी में छड़ उठाकर तार जोड़ दिए। बच्चे को क्या पता था कि उसकी आंखों की रोशनी चली चली जाएगी। ब्लास्ट के बाद से बेटे ने आंखें नहीं खोली। खंडवा के डॉक्टरों ने काफी कोशिश की। इंदौर आने के बाद यहां के डॉक्टर भी कोशिश कर रहे हैं। मेरे बेटे की जिंदगी में अंधेरा हो गया। डॉक्टरों ने कहा बांई आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी है। दांई की कुछ उम्मीद है लेकिन वह आंखें खुलने के बाद ही स्पष्ट होगा। खंडवा जिला मेडिकल कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डॉ. चांदनी कारोले ने बताया संपूर्ण जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है, लेकिन एक आंख खराब हो चुकी है।


लोगों के लिए खिलौना बन गई छड़ें : खालवा क्षेत्र के गांवों में गर्मी के दौरान जलस्तर गिर जाता है। कुओं का गहरीकरण और अवैध रूप से मछली पकड़ने का काम बड़े स्तर पर होता है। इस कारण जिलेटिन की छड़ें यहां के लोगों के लिए खिलौना बन गई है। खालवा व आसपास के गांवों में प्रतिबंधित छड़ें आसानी से मिल जाती हैं।


माइनिंग ठेकेदार बेच रहे जिलेटिन : जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में माइनिंग ठेकेदारों को हर महीने हजारों जिलेटिन छड़ें लगती हैं। इसलिए ज्यादातर ठेकेदारों का जिलेटिन बेचने का लाइसेंस बना हुआ है। रसूखदार ठेकेदारों से अफसर भी हिसाब नहीं पूछते कि उन्होंने एक महीने में कितनी जिलेटिन छड़ों का इस्तेमाल किया।

 

जिलेटिन छड़ बेचने से लेकर ब्लास्ट करने तक के : हर महीने कितनी जिलेटिन छड़ें बेची है, इसका हिसाब संबंधित थाने में देना अनिवार्य है, लेकिन ऐसा होता नहीं है। खालवा सहित खंडवा, देशगांव, छैगांव में जिलेटिन छड़ों के कारखाने हैं। कहां कितना ब्लास्ट हुआ, कितनी छड़ें बिकी, किसके खेत में विस्फोट किया, माइनिंग क्षेत्र में कौनसा ठेकेदार विस्फोट कर रहा है, इसकी जानकारी पहले से पुलिस को होना चाहिए, लेकिन ये हो नहीं रहा। अनुमति लेने के बाद भी ब्लास्ट के दौरान एंबुलेंस होना जरूरी है ताकि अनहोनी होती ही तत्काल घायलों का इलाज कराया जा सके।
 

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