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105 वर्षीय संत सियाराम बाबा को बुखार, एक हाथ में सलाइन तो दूसरे में श्रीरामचरितमानस रख पाठ भी जारी

4 वर्ष पहले
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खरगोन जिले के नर्मदा तट स्थित भट्याण आश्रम के अनुयायी चिंतित, शाम की आरती बाद डॉक्टर कर रहे हैं इलाज, हालत बेहतर

भास्कर संवाददाता | कसरावद

नर्मदा किनारे भट्याण बुजुर्ग आश्रम के संतश्री सियाराम बाबा को दो दिन से बुखार है। 105 साल की उम्र में भी वे सारे कामकाज खुद ही कर रहे हैं। उनके अनुयायी संत के स्वास्थ्य को लेकर चिंता में है। यह देख उन्होंने सलाइन लगाई है। वे आश्रम में पहुंचने वाले भक्तों की प्रसादी व चाय की व्यवस्था खुद कर रहे हैं। तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने इलाज लेने से भी इनकार कर दिया। भक्तों के आग्रह पर उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों से ही इलाज लिया। वे आराम करने की बजाय बैठकर एक हाथ में सलाइन व दूसरे में श्रीरामचरितमानस रखकर पढ़ रहे हैं।

आश्रम से जुड़े सदस्य हरीश भाई, राजेश बिरले, महेश पटेल व पूनमचंद बिरले के मुताबिक बाबा के स्वास्थ्य में सुधार है। वे इलाज कराने से इनकार कर देते हैं। भक्तों के आग्रह पर राजी हुए। शाम की आरती के बाद इलाज करा रहे हैं।

10 साल की खड़ेश्वरी सिद्धि की : भक्त बतातेे हैं मौसम कोई भी हो बाबा केवल एक लंगोट पहनते हैं। उन्होंने 10 साल तक खड़ेश्वरी सिद्धी की है। इसमें तपस्वी सोने, जागने सहित हर काम खड़े रहकर ही करते हैं। खड़ेश्वरी साधना के दौरान नर्मदा में बाढ़ आई। पानी बाबा की नाभि तक पहुंच गया, लेकिन वे अपनी जगह से नहीं हटे।

विदेशी भक्त पहुंचते हैं:बाबा के दर्शन के लिए विदेश से भी अनुयायी पहुंचते हैं। भक्तों के मुताबिक अर्जेंटीना व ऑस्ट्रिया से कुछ विदेशी लोग पहुंचे। उन्होंने बाबा को 500 रुपए भेंट में दिए। संत ने 10 रुपए प्रसादी के रखकर बाकी लौटा दिए। वे भी आश्चर्यचकित थे।

भास्कर संवाददाता | कसरावद

नर्मदा किनारे भट्याण बुजुर्ग आश्रम के संतश्री सियाराम बाबा को दो दिन से बुखार है। 105 साल की उम्र में भी वे सारे कामकाज खुद ही कर रहे हैं। उनके अनुयायी संत के स्वास्थ्य को लेकर चिंता में है। यह देख उन्होंने सलाइन लगाई है। वे आश्रम में पहुंचने वाले भक्तों की प्रसादी व चाय की व्यवस्था खुद कर रहे हैं। तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने इलाज लेने से भी इनकार कर दिया। भक्तों के आग्रह पर उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों से ही इलाज लिया। वे आराम करने की बजाय बैठकर एक हाथ में सलाइन व दूसरे में श्रीरामचरितमानस रखकर पढ़ रहे हैं।

आश्रम से जुड़े सदस्य हरीश भाई, राजेश बिरले, महेश पटेल व पूनमचंद बिरले के मुताबिक बाबा के स्वास्थ्य में सुधार है। वे इलाज कराने से इनकार कर देते हैं। भक्तों के आग्रह पर राजी हुए। शाम की आरती के बाद इलाज करा रहे हैं।

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