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दानी, साहसी और ईमानदार के ठप्पे लगे थे इन अफसरों पर ... सच कुछ और निकला

एक वर्ष पहले
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लाेकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार, रिश्वत और अनुपातहीन संपत्ति के मामले में पिछले तीन साल में शहर में कटनी के खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रबंधक सलमान हैदर सहित 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के यहां छापे मारे। करीब 200 कराेड़ रुपए की काली कमाई पकड़ने का दावा किया। यही दावा सुर्खियां बना, लेकिन एेसी कार्रवाई के बाद हुअा क्या? क्या कोई अधिकारी-कर्मचारी भ्रष्टाचार में दोषी पाया गया? क्या किसी को सजा हुई? क्या किसी की संपत्ति राजसात की गई? इनमें से कई केस में अभी जांच ही चलना बताया जाता है, जबकि प्रदेश में 250 से ज्यादा भ्रष्ट अफसरों पर केस चलना है। आखिर ऐसे मामलों में कार्रवाई जांच से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रही है, इसी पर रोशनी डालती ये रिपोर्ट...

बेलदार से जीएम तक; जांच, अनुसंधान, विवेचना जारी

सब इंजीनियर राजेंद्र शर्मा

5 करोड़ की संपत्ति

3 मई 2016 को पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर राजेंद्र शर्मा के इंद्रपुरी स्थित घर पर छापा मारा। खुलासा : पांच करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का पता चला। हुआ क्या : जांच जारी है।

इंजीनियर आनंद राणे

15 करोड़ की संपत्ति

3 दिसंबर 2016 को पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री राणे के इंदौर वाले पर भी छापा मारा था। खुलासा : 15 करोड़ की संपत्ति पता चली। हुआ क्या : जांच चल रही है।

महाप्रबंधक अशोक चावला

3 करोड़ की संपत्ति

ग्रामीण सड़क प्राधिकरण पीईयू के जीएम के यहां 19 अगस्त 2017 को छापा मारा। खुलासा : 3 करोड़ की संपत्ति मिली। हुआ क्या : चालान पेश नहीं हुआ। वे रिटायर हो चुके हैं।

अपर कलेक्टर आनंद जैन

करोड़ों रुपए की संपत्ति

24 दिसंबर 2017 को रिटायर्ड अपर कलेक्टर आनंद जैन के घर पर छापा मारा था। खुलासा : करोड़ों रुपए की संपत्ति मिली थी। हुआ क्या : अनुसंधान जारी है।

एक्साइज अफसर पराक्रम

50 करोड़ की संपत्ति

27 अप्रैल 2018 को धार आबकारी अधिकारी पराक्रम सिंह चंद्रावत के घर छापा मारा। खुलासा : 50 करोड़ की संपत्ति पता चली। हुआ क्या : चंद्रावत निलंबित हैं। जांच जारी है।

सहायक आयुक्त शकुंतला

करोड़ों की संपत्ति

7 दिसंबर 2018 को जनजाति कार्य विभाग खरगोन की सहायक आयुक्त के यहां छापा मारा। संपत्ति : करोड़ों की संपत्ति मिली। हुआ क्या : डामोर फिलहाल सस्पेंड हैं। जांच चल रही है।

वाणिज्यिक कर अधिकारी कोमल बाली : 1.5 करोड़

21 मई को सहायक वाणिज्यकर अधिकारी कोमल बाली के उषागंज स्थित घर और फार्म हाउस पर लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा। संपत्ति : करीब डेढ़ करोड़ रुपए की संपत्ति मिली। कार्रवाई : जांच चल रही है।

एसपी बोले- मुख्यालय से अनुमति लेकर पेश करते हैं चालान

अनुपातहीन संपत्ति के प्रकरणों की जांच अलग-अलग अफसर करते हैं। जांच समय पर पूरी करने का प्रयास करते है। इसके बाद मुख्यालय से मंजूरी लेकर चालान पेश करते हैं। - एसएस सराफ, लोकायुक्त एसपी इंदौर संभाग

सलमान ने एक करोड़ का दान दिया। हज यात्रा पर 40 लाख खर्च किए।

डॉक्टर शारिक मो. शेख

10 करोड़ की संपत्ति

27 अक्टूबर 2016 को पशु चिकित्सालय के डॉ. शारिक मो. शेख के घर छापा मारा था। खुलासा : 10 करोड़ की बेनामी संपत्ति मिली। हुआ क्या : विवेचना जारी है।

क्लर्क राजेंद्र बिरथरे

5 करोड़ की संपत्ति

9 दिसंबर 2016 को आईडीए के क्लर्क राजेंद्र बिरथरे के स्कीम 114 स्थित घर छापा मारा। खुलासा : पांच करोड़ की संपत्ति मिली थी। हुआ क्या : विवेचना जारी है।

उप संचालक अनिता कुरोठे

20 करोड़ की संपत्ति

12 सितंबर 2017 को टीएंडसीपी देवास की उप संचालक अनिता कुरोठे के इंदौर स्थित घर छापा मारा। खुलासा : 20 करोड़ की संपत्ति मिली। हुआ क्या : जांच जारी है।

लाइनमैन छगनलाल राठौर

1 करोड़ की संपत्ति

6 जनवरी 2018 को मनावर के अवल्दा मंडल में पदस्थ लाइनमैन के यहां छापा। खुलासा : एक करोड़ से अधिक की संपत्ति मिली थी। हुआ क्या : विवेचना जारी है।

बेलदार असलम खान

20 करोड़ की संपत्ति

6 अगस्त 2018 को निगम के बेलदार के घर छापा मारा था। खुलासा : 20-25 करोड़ की संपत्ति मिली। हुआ क्या : असलम निलंबित है। जांच चल रही है।

इंजीनियर गजानंद पाटीदार

करोड़ों की संपत्ति

4 मई 2019 को इंदौर विकास प्राधिकरण के उपयंत्री के यहां लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा था। खुलासा : 23 प्लाॅट सहित करोड़ की बेनामी संपत्ति मिली। कार्रवाई : जांच शुरू हुई है।

आरएन सक्सेना, एसडीओ

महू के एसडीओ फॉरेस्ट सक्सेना के यहां 23 दिसंबर 2018 को छापा मारा। खुलासा : मकान, प्लॉट, होस्टल समेत करोड़ों की संपत्ति मिली। हुआ क्या : जांच चल रही है।

250 अफसरों पर तो सरकार ही नहीं दे रही केस की मंजूरी

यह सब इंजीनियर तिवारी का घर... भ्रष्टाचार का आंगन था, अब आंगनवाड़ी

अांगनबाड़ी की यह तस्वीर सुदामा नगर के सेक्टर-डी के मकान नं. 1675 की, जाे कभी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सब इंजीनियर अरविंद तिवारी का मकान हाेता था। लाेकायुक्त पुलिस ने 2009 में तिवारी के यहां छापा मारकर दाे कराेड़ की संपत्ति पकड़ी थी। बाद में इस घर काे राजसात कर अांगनबाड़ी खाेली गई।

लेकिन हर बार भ्रष्टाें से हमारा पैसा इस तरह नहीं लौटा पाता लोकायुक्त, इन तीन चरणों में बच जाते हैं अफसर

1. छापे से पहले शिकायत की छानबीन के बाद होती है कार्रवाई

कोई भी व्यक्ति किसी के पास अनुपातहीन संपत्ति होने की शिकायत सीधे राज्य लोकायुक्त भोपाल से करता है तो उसे शपथ पत्र देना होता है। लोकायुक्त एसपी, डीएसपी या इंस्पेक्टर से भी शिकायत की जाती है। लोकायुक्त पुलिस संबंधित की जमीन, प्लाॅट और मकान संबंधी जानकारी जुटाती है। पता किया जाता है कि संबंधित की नौकरी में अब तक का वेतन कितना है। अचल संपत्ति का मोटे तौर आकलन कर उसमें से 40 प्रतिशत खर्च घर चलाने आदि के लिए निकाला जाता है। बाकी 60 प्रतिशत राशि उसके वेतन या वैध आय से ज्यादा होती है तो माना जाता है कि अनुपातहीन संपत्ति का मामला बनता है। फिर लोकायुक्त पुलिस कार्यालय मामला भोपाल मुख्यालय भेजता है। वहां भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज किया जाता है। वहां से एफआईआर आने पर लोकायुक्त एसपी कार्यालय द्वारा कोर्ट में एफआईआर पेश कर संबंधित के घर तलाशी के लिए वारंट मांगा जाता है। कोर्ट से वारंट मिलने के बाद संबंधित के यहां तलाशी की जाती है।

2. जांच के दौरान

इसलिए लग जाता है समय

छापे में मिली संपत्ति की मूल रजिस्ट्री, बिल सहित सारे दस्तावेज जब्त किए जाते हैं। उनकी तस्दीक के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय, निगम, विकास प्राधिकरण या संबंधित विभाग से जानकारी और सर्टिफाइड दस्तावेज मांगे जाते हैं। यह जानकारी समय पर नहीं मिल पाती है।

संबंधित व्यक्ति की अचल संपत्ति का मूल्यांकन पीडब्ल्यूडी करता है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित की वैध कमाई का पता किया जाता है। पाई गई चल-अचल संपत्ति की कीमत का आकलन कर वैध कमाई निकालकर दस्तावेज और साक्ष्य के साथ कोर्ट में चालान पेश किया जाता है।

संबंधित के खिलाफ चालान उसके विभाग की स्वीकृति के बगैर कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता। विभाग से अभियोजन स्वीकृति मांगी जाती है। विभाग लंबे समय तक मंजूरी ही नहीं देता है।

9 मार्च 2018 को पल्हर नगर में सक्सेना का तेंदुए से हुआ सामना।

जाकिर हुसैन, पटवारी

30 अगस्त 2018 को पटवारी के मकान में छापा मारा था। खुलासा : मामा के नाम 10- 15 करोड़ की संपत्ति मिली। हुआ क्या : जाकिर फिलहाल निलंबित हैं। जांच जारी है।

3. फैसला आने पर

इसलिए मिलती है क्लीन चिट

छापे के बाद लोकायुक्त पुलिस आधिकारिक तौर पर न संपत्ति की कीमत नहीं लिखती और न बताती है। जांच में देखा जाता है कि चल-अचल संपत्ति कितने साल पहले खरीदी गई थी? तब उनकी कीमत क्या थी? वास्तविक कीमत चालान में शामिल की जाती है। चालान में उसके कुल वेतन को जोड़कर वैध राशि कम करके बताई जाती है।

ट्रायल में लोकायुक्त पुलिस दस्तावेज पेश कर अनुपातहीन संपत्ति होना सिद्ध करती है। आरोपी की ओर से संपत्ति वैध होने के लिए प्रमाण आदि पेश किए जाते हैं। प्राय: जांच में जो दस्तावेज चाहिए, वह नहीं मिल पाते हैं।

चालान के समय जो अवैध कमाई की कीमत निकाली जाती है, कोर्ट में ट्रायल के बाद अदालत पर निर्भर है कि वह चालान में बताई राशि में से कितनी राशि कम-ज्यादा माने।

जाकिर ने फेसबुक पर खुद को ईमानदार और सादगी पसंद बताया था।

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