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मेडिकल कॉलेज के निर्माण में देरी, दो साल में होना था काम 4 साल बाद भी रह गया अधूरा

2 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल परिसर में चार साल से निर्माण कार्य चल रहा है।

विसंगति : संभागीय परियोजना यंत्री की अनुशंसा पर एपीडी सहमत, काम समाप्त करने के लिए दी 30 अक्टूबर 2019 की डेडलाइन

ठेकेदार को बिना जुर्माना 891 दिन की समय वृद्धि की दी स्वीकृत

भास्कर संवाददाता | खंडवा

मेडिकल कॉलेज निर्माण व जिला अस्पताल का अपग्रेडेशन चार साल बाद भी अधूरा है। यह काम दाे साल में किया जाना था। ठेकेदार को नोटिस पर नोटिस दे रहे पीआईयू ने अब निर्माण में देरी के लिए शासन को जिम्मेदार माना है। संभागीय परियोजना यंत्री की अनुशंसा पर अतिरिक्त परियोजना संचालक इंदौर ने ठेकेदार को बिना जुर्माना 891 दिन की समयावृद्धि की स्वीकृति दे दी। उन्होंने काम के लिए अब 30 अक्टूबर 2019 की डेडलाइन तय की है।

शासन को निर्माण में देरी के लिए जिम्मेदार मानने वाले अधिकारी अपने पत्र में इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं कर रहे हैं कि आखिरकार इसके लिए दोषी कौन है?। पीआईयू के संभागीय परियोजना यंत्री सतीश शर्मा प्रमाण पत्रों के आधार पर ठेकेदार को बिना जुर्माना समयावृद्धि दिलाने का दावा कर रहे हैं लेकिन किसी को कार्रवाई के लिए दोषी नहीं मान रहे हैं। जानकारी के मुताबिक कॉलेज निर्माण के लिए 25 अगस्त 2015 को वर्क आर्डर जारी हुआ था। शासन ने निर्माण के लिए 24 महीने अर्थात 24 अगस्त 2017 डेडलाइन तय की थी। निर्माण का काम गैनन डंकरली एंड कंपनी लिमिटेड मुंबई (जीडीसीएल) कर रही हैं। जीडीसीएल ने मई में अस्पताल के अपग्रेडेशन काम बीच में छोड़ दिया। इसके बाद पीआईयू ने दूसरे ठेकेदार को काम दिया।

बाकी मुझे नहीं पता

जिस कारण से मेडिकल कॉलेज के निर्माण में देरी हुई है, उसी कागज को हमने लगा के दिया है। बाकी मुझे नहीं पता। -सतीश शर्मा, संभागीय परियोजना यंत्री, पीआईयू

देरी पर ठेकेदार पर लगता 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना

निर्माण में देरी पर अबतक लगभग 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना ठेकेदार पर लगाया जा चुका था। जिसे संभागीय परियोजना यंत्री की बिना जुर्माना समयावृद्धि की अनुशंसा के बाद लौटाया गया। यदि ठेकेदार को निर्माण में देरी पर दोषी माना जाता तो उस पर लगभग 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया जाता।

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