दिगंबर जैन समाज... जो परोपकार करता है उसका स्वयं उपकार हो जाता है - महाराज

Khandwa News - खिरकिया | मनुष्य को परोपकार की परंपरा नहीं भूलना चाहिे। स्त्री पुरुष का उपकार माने, पुरुष स्त्री का उपकार माने,...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:26 AM IST
Khirkiya News - mp news digambar jain samaj who pays philanthropy he favors himself maharaj
खिरकिया | मनुष्य को परोपकार की परंपरा नहीं भूलना चाहिे। स्त्री पुरुष का उपकार माने, पुरुष स्त्री का उपकार माने, माता-पिता संतान का और संतान माता-पिता का उपकार माने, श्रावक श्रमण का और श्रमण श्रावकों का उपकार माने। जो परोपकार करता है उसका स्वयं ही उपकार हो जाता है। किसी ने अपकार भी कर दिया, कुछ कह दिया हो तो उससे कुछ मत कहो। स्वयं विचार करो, गलती उसकी नहीं है। गलती मेरी है, मैंने जन्म क्यों लिया, जन्म न लेता, जीव का उपकार करता तो, परमात्मा बन जाता। उपकार करेगा तो ही जीव की रक्षा होगी।

दिगंबर जैन समाज के निर्माणाधीन जिनालय में गुरुवार को यह उद्गार 1008 श्रमणाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज के शिष्य आस्तिक्य सागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे मुनि प्रणीत सागरजी महाराज के साथ गुरुवार सुबह ही खिरकिया पहुंचे। उन्होंने कहा प्रत्येक जीव को धर्म की ऊंचाई पर ले जाना था परंतु वह अपने कर्तव्यों से दूर हटता जा रहा है। धर्म को ऊंचाइयों पर चाहते हो तो श्रमण और श्रावक अपने कर्तव्यों का पालन करे। मुनिश्री प्रणीत सागर महाराज ने कहा गुरुओं में अगर करोगे भेद तो अंत में तुमको ही होगा खेद। भगवान कभी कहते नहीं यह मेरा भक्त, यह उनका भक्त, जो भगवान को बांटे वह भक्त नहीं कमबख्त है। दोनों मुनियों ने गुरुवार शाम को ही हरदा की ओर पद विहार कर दिया। मुनियों को इटारसी पहुंचना है जहां उनके गुरु विशुद्ध सागरजी महाराज आने वाले हैं।

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