तलवार अगर मुफ्त में भी मिलती है तो मत लो, इनसे बच्चों के मुकद्दर नहीं बनते- इंसाक असर

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 04:20 AM IST

Badwani News - इंसाक असर - लफ्जों के सजा लेने से मंजर नहीं बनते, हर कागजी पानी से समंदर नहीं बनते। तलवार अगर मुफ्त भी मिलती है तो मत...

Rajpur News - mp news do not take the sword if it is available for free it does not make the children39s judges
इंसाक असर - लफ्जों के सजा लेने से मंजर नहीं बनते, हर कागजी पानी से समंदर नहीं बनते। तलवार अगर मुफ्त भी मिलती है तो मत लो, तलवार से बच्चों के मुकद्दर नहीं बनते।

आरिफ इकरा - आंधियाें से न तूफान से डर लगता है, मुझको गुलशन के निगेहबानों से डर लगता है।

राज सागरी - मेरे मकान की दीवार गिर नहीं सकती, हरेक ईंट का सदका निकाल रखा है।

साजिद परवाज - कोई अदना कोई आला है, ये मुहब्बत की पाठशाला है। जद में आएगी अम्न की चिडिय़ा, फिर शिकारी ने जाल डाला है।

कयामुद्दीन कयाम - वतन की खुशबुएं तहजीब, एक जमाना साथ रखते हैं, बर्तनों में आबे गंगा साथ रखते हैं। वफादारे वतन हम हैं नहीं तो देख लो आकर, मदीना तक भी तिरंगा अपने साथ रखते हैं।

जुनैद अहमद जुनैद - महकते इन गुलाबों को चमन की गोद प्यारी है, चमकते चांद का यारों गगन की गोद प्यारी है। लिपटकर सो गया मजनूं जैसे फूल से खुशबू, हमें लैला नहीं यारों वतन की गोद प्यारी है।

कादीर हनफी, राजपुर - किसी तबीब ना कोई दवा से मिलता है। सुकूने कल्ब तो मां की दुआ से मिलता है।

कार्यक्रम में मौजूद शायर और आयोजन समिति सदस्य।

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