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हेमा के अहंकार पर भारी हो सकती है किसानों की नाराजगी

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:05 AM IST

Khandwa News - इस चुनाव में खड़े नेताओं के बेटे, बेटी, बहुएं और दामाद अपने भाषणों में अक्सर अपने पिता या ससुर का उल्लेख करते हैं,...

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इस चुनाव में खड़े नेताओं के बेटे, बेटी, बहुएं और दामाद अपने भाषणों में अक्सर अपने पिता या ससुर का उल्लेख करते हैं, ताकि जो मतदाता उन्हें या उनके काम के बारे में नहीं जानता है, उसे उनकी पहचान हो सके। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में प्रदेश के सबसे शक्तिशाली यादव परिवार के चाचा-भतीजा आमने-सामने हैं। यह परिवार राज्य में गांधी-नेहरू परिवार से भी ज्यादा प्रभावशाली है। यहां पर समाजवादी पार्टी से अलग हुए अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का मुकाबला अखिलेश के दूसरे चाचा रामगोपाल यादव के बेटे मौजूदा सांसद अक्षय यादव से है। लोगों का कहना है कि वे जब भी अक्षय के पास किसी समस्या को लेकर जाते हैं तो उनका पसंदीदा जवाब होता है कि ‘पापा को पूछो’ या ‘पापा कहते हैं’।

वहीं पास की मथुरा सीट पर अपनी सीट को बनाए रखने के लिए अभिनेत्री से नेत्री बनीं हेमा मालिनी को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। रोज बनारसी से चंदेरी और जरीदार जार्जेट की नई साड़ी पहन कर दिखने वाली हेमा मालिनी पर नजर तो टिकती है, लेकिन उनके तेवरों का लोग मजाक भी उड़ाते हैं। लोगों का कहना है कि 40 डिग्री सेल्सियस में उनका इंतजार कर रहे लोग जब उनके करीब जाने की कोशिश करते हैं ताे वह नाक सिकोड़ लेती हैं। हेमा के पास जाना आसान नहीं है। वह यदा-कदा जब भी यहां आती हैं तो एक बंगले में रहती हैं, जिसे वह अपना बताती हैं। वह बाहरी होने की बात को खारिज कर देती हैं पर पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को भी नहीं पहचानतीं। भाजपा कार्यकर्ताओं समेत सभी लोगांे का कहना है कि वह उपलब्ध नहीं रहतीं। वह मीडिया को इंटरव्यू देना पसंद नहीं करती हैं। फिल्मी दिनों में भी शायद ही कोई उनके करीब पहुंच पाता था। अगर पहुंच गया तो उनका एक ही जवाब होता था ‘अम्मा से पूछो’ और कोई भी उनकी मां जया चक्रवर्ती से तो मिलना नहीं चाहता था। वैसे भी वह पत्रकारों के प्रति काफी कठोर समझी जाती थीं।

अहंकार के मामले में सपा के अक्षय यादव भाजपा की हेमा मालिनी के ही समान हैं। अक्षय को उनकी ताकत और दंभ अखिलेश से उनकी नजदीकी की वजह से मिला है। उन्हें लगता है कि अखिलेश की वजह से वोटर उनके प्रति नाराजगी को भूल जाएंगे। मोदी लहर पर सवार होकर 2014 में जीतने वाली हेमा को भरोसा है कि उनका काम बोलेगा। वह कहती हैं कि उन्होंने पहले चुनाव न लड़ने का फैसला किया था, लेकिन उनके परिवार ने उनको समझाया कि टीम मोदी को उनकी जरूरत है। उनके सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने वाले उनके भाई भी उनके साथ रहते हैं। वह सुनिश्चित करते हैं कि उनका हर कार्यक्रम तय समय पर हो, अन्यथा हेमा बहुत नाराज हो जाती हैं। उनकी बेटियां तो इस बार प्रचार में नहीं आई हैं, लेकिन धर्मेंद्र उनके लिए प्रचार कर चुके हैं। उनको देखने के लिए भीड़ तो आती है पर क्या कोई बता सकता है कि यह वोट में भी बदलेगी?

मथुरा नगरी में लोग बंदरों की समस्या से परेशान हैं। सांसद द्वारा यमुना को साफ न करा पाने से भी नाराज हैं। पब्लिक टॉयलेट की कमी और गंदगी कष्टकारी है। ग्रामीण इलाकों में आलू किसान नाराज हैं और ब्रज क्षेत्र में यह सबसे बड़ा मुद्दा है। पड़ोसी आगरा-फतेहपुर सीकरी में भी आलू किसानों की नाराजगी दिख रही है। लगातार तीसरे साल आलू का उचित दाम न मिलने से किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। शेष पेज 7 पर

उत्तर प्रदेश से

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

स्मिता प्रकाश

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