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दो संतों ने एक साथ जयंती मनाने का दिलाया था संकल्प, तभी से सकल जैन समाज मनाता है उत्सव

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:10 AM IST

Khandwa News - भास्कर संवाददाता | खंडवा पूजन पद्धति अलग-अलग हाेने के बावजूद भगवान महावीर की जयंती बुधवार काे सकल जैन समाज...

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भास्कर संवाददाता | खंडवा

पूजन पद्धति अलग-अलग हाेने के बावजूद भगवान महावीर की जयंती बुधवार काे सकल जैन समाज मनाएगा। 24 साल पहले इसके लिए दाे संताें ने दिगंबर अाैर श्वेतांबर समाज काे एकजुट कर संकल्प दिलाया था। 1995 में चातुर्मास के लिए दिगंबर समाज के क्रांतिकारी संत तरुण सागर अाैर श्वेतांबर समाज के संत कमल मुनि महाराज खंडवा में रुके थे। दाेनाें ही संताें ने समाज के लाेगाें से अाह्वान किया कि हम सब भगवान महावीर की संतान है। फिर भी त्याेहार अलग-अलग मनाते हैं। पूजन की विधि अलग है लेकिन भगवान की जयंती सकल जैन समाज काे एक साथ मनानी चाहिए। उन्हाेंने लाेगाें काे इसके लिए संकल्प दिलाया। इसके बाद से शहर में सकल जैन समाज एकजुट हाेकर महावीर जयंती मना रहा है।

दिगंबर समाज के मंदिर

प्राचीन पार्श्वनाथ जैन मंदिर सराफा, महावीर जैन मंदिर घासपुरा, अादिनाथ जैन मंदिर इंदाैर राेड पर कहान, दिगम्बर अादिनाथ जैन मंदिर छात्रवास माेघट राेड, चंद्रप्रभु जैन मंदिर सेठी नगर अाैर मुनि सुव्रतनाथ जैन मंदिर नवकार नगर है।

शहर में जैन समाज की स्थिति

शहर में यहां पर हैं श्वेतांबर समाज के मंदिर

घंटाघर क्षेत्र में श्री जगवल्लभ पार्श्वनाथ मंदिर अाैर रामकृष्ण में नमीनाथ जैन मंदिर श्वेतांबर जैन समाज के हैं। इसके अलावा एक स्थानक भवन कहारवाड़ी क्षेत्र में हैं। श्वेतांबर समाज के प्रवक्ता शांतिलाल छाजेड़ के अनुसार श्वेतांबर समाज में दाे पंथ हैं। पूजन विधि अलग-अलग हाेती है। मूर्ति पूजक लाेग मंदिर में पूजन करते हैं। वहीं स्थानकवासी स्वाध्याय में पूजा करते हैं। शास्त्र काे मानते हैं। मूर्ति पूजन नहीं हाेता है।

100 साल पुराना रथ हांकते हैं समाज के लाेग

भगवान महावीर के जियाे अाैर जीने दाे के संदेश का पालन करने के लिए महावीर जयंती पर निकलने वाले रथ काे समाज के लाेग हांकते हैं। 8 साल पहले इसके लिए दिगंबर जैन साेश्यल ग्रुप ने अाैर युवा मंडल ने संकल्प लिया था। तभी से यह परंपरा चल रही है। शहर में 100 साल पुराना अष्ट धातु से बना रथ है। इस पर इंद्र अाैर इंद्राणी की तरह शृंगार के समाज के करीब 20 लाेग बैठते हैं। जुलूस के दाैरान बैलाें काे कष्ट हाेता था। इसलिए इस परंपरा की शुरुअात की गई थी।

600 परिवार दिगंबर जैन समाज के

जैन स्तंभ के पास किया श्रमदान

महावीर जयंती के एक दिन पहले घंटाघर पर महावीर उद्यान में स्थापित जैन स्तंभ की सामाजिक बंधुओं के साथ क्षेत्र के पार्षद सोमनाथ काले एवं सुनील जैन ने नगर निगम कर्मचारियों के साथ श्रमदान कर साफ-सफाई की। यहां जयंती पर ध्वजा रोहण किया जाएगा।

ना चाहते हुए भी कर्म फल भोगना पड़ता है

पाप और पुण्य कर्म जन्य हैं। आत्मा कर्म बांधने या ना बांधने के लिए स्वतंत्र है। व्यक्ति पाप कर्म का फल भोगना नहीं चाहता, फिर भी उसे भोगना पड़ता है। आत्म ज्योति सबकी समान होती है कंतु कर्म आवरण के कारण जीवन विकास में भिन्नता परिलक्षित होती है। हमारा कर्म आवरण जितना गहरा या हल्का होगा उसी अनुरूप जीवन का विकास होगा। टपालचाल महावीर भवन में यह बात श्वेतांबर जैन संत गुलाब मुनिश्री ने कही। संत ने श्रावकों को उत्तम जीवन के कई मार्ग बताए।

खंडवा में अनाेखी है परंपरा


अन्य जगह भी हाेने लगे कार्यक्रम


140 परिवार श्वेतांबर समाज के

6 मंदिर दिगंबर समाज के

2 मंदिर श्वेतांबर समाज के

अाज सराफा से निकाली जाएगी श्रीजी की रथ यात्रा

खंडवा |
जीओ और जीने दो, अहिंसा परमो धर्म का संदेश देने वाले जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव बुधवार को सकल जैन समाज मनाएगा। बुधवार को सकल जैन समाज सराफा स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर से भगवान महावीर की रथ यात्रा सुबह 8 बजे निकालेगा। इसके पहले तुलसी उद्यान में मगनलाल जैन, कोकिला जैन सत्तू वाले परिवार द्वारा ध्वजा रोहण किया जाएगा। रथ यात्रा सराफा से रामगंज, बुधवारा, केवलराम पेट्रोल पंप, बांबे बाजार, घंटाघर, विट्ठल मंदिर से घासपुरा महावीर जैन मंदिर पहुंचेगी। जहां मंदिर के सामने महाआरती का आयोजन होगा। तत्पश्चात यह यात्रा रामकृष्ण गंज स्थित नमीनाथ श्वेतांबर मंदिर पहुंचेगी। आरती के पश्चात घंटाघर पर महावीर उद्यान में एसडीएम अनुभा जैन, डाॅ. नरेंद्र जैन, तोतालाल पहाड़िया, सतीश मूलचंद जैन द्वारा केसरिया ध्वज फहराया जाएगा। उसके पश्चात रथ यात्रा सराफा धर्मशाला पहुंचेगी। जहां भगवान का अभिषेक व शांतिधारा के साथ समापन होगा।

2 धर्मशाला दिगंबर जैन समाज के लिए

ढाई हजार साल पुराना है हमारा खंडवा शहर

अंग्रेज इतिहासकार अलेक्जेंडर कनिंघम व क्लाडियस टाॅलमी ने अपनी किताबों में किया था खंडवा का उल्लेख

शहर में जैन धर्म की प्राचीन मूर्तियां हैं। हरिगंज, ब्राहृम्णपुरी, मीरपुरा, मूंदीपुरा, सराफा क्षेत्र में आज भी पुराने भवनों की खुदाई में नक्काशीदार जैन मूर्तियां निकलती हैं। इतिहास के जानकार व रिटायर्ड प्रोफेसर सैयद सफदर रजा खंडवी ने अपनी किताब उर्दू की तरक्की में निमाड़ का हिस्सा में पृष्ठ क्रमांक 184 व 185 में उल्लेख किया है कि खंडवा शहर करीब ढाई हजार साल पुराना शहर है। अंग्रेज इतिहासकार अलेक्जेंडर कनिंघम व क्लाडियस टाॅलमी ने अपनी किताबों में उल्लेख किया था कि यहां (खंडवा) में 12वीं व 13वीं सदी में जैन धर्म की मूर्तियां खूबसूरत पत्थरों से तराशी हुई मिलती थीं। जिससे शहर के प्राचीन होने का सुबूत मिलता है। पदमकुंड, रामेश्वरकुंड, भीमकुंड में जो शिलालेख प्राप्त हुए हैं, उन पर नक्काशी थी। उन शिलालेखों में संवत 1185 और ईसवी 1128 उल्लेखित है। ये तमाम शिलालेख टूटी हुई हालत में थे। इतिहासकार कनिंघम लिखता है कि मुझे यकीन है कि ये जैन मंदिर ही रहे होंगे। क्योंकि तारीख संवत 1185 आषाढ़ सुधी 10 जैन तीर्थंकर आदिनाथ की मूर्तियों जो कि खंडवा के जैन मंदिर में है। ये मूर्ति उन में से एक है। जो कि खंडवा के सराफा स्थित जैन मंदिर में मौजूद है। इससे पता लगता है कि यहां का प्राचीन धर्म जैन धर्म रहा होगा या फिर जैन धर्म के मानने वाले यहां रहे होंगे।

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