नर्मदा जल याेजना / जहां कर रहे सुधार वहीं फूट रही पाइप लाइन, मछाेंडी के पास पाइप फूटने पर आज नहीं बंटा पानी



Narmada Nal Jal Yojana's pipeline split, no water supply
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Narmada Nal Jal Yojana's pipeline split, no water supply

  • 1 महीने में 4 और 4 साल में 79 बार फूटी लाइन, सुधारने में खर्च कर दिए दाे कराेड़ रु. 
  • 25 साल तक विश्वा कंपनी काे करना है याेजना का संचालन संधारण 
  • 1.59 कराेड़ रुपए डीपीअार बनाने के लिए दे दिए कंसलटेंट कंपनी काे 

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 12:29 PM IST

खंडवा. नर्मदा जल याेजना की मुख्य पाइप लाइन गुरुवार को मछाेंडी गांव के पास फिर फूट गई। इस कारण शुक्रवार काे शहर में पानी सप्लाय नहीं हाे सका। विश्वा कंपनी ने गुरुवार दाेपहर 3.30 बजे चारखेड़ा फिल्टर प्लांट से शहर में पानी की सप्लाय बंद कर काम शुरू किया जो शुक्रवार सुबह तक चला। इससे शहर तक पानी आने में करीब 18 घंटे लगेंगे। एेसे में नलाें में पानी सप्लाय शनिवार काे ही हाे पाएगा। एक महीने में चाैथी बार पाइप लाइन फूटने से शहर में जलसंकट बढ़ गया। लाेग जनप्रतिनिधि अाैर अफसराें काे घेर रहे हैं। 

 

निगम ने पाइप लाइन फूटने पर 2015 से रिकार्ड रखना शुरू किया। इसके मुताबिक अब तक 79 बार पाइप लाइन फूट चुकी है। इसे सुधारने में विश्वा कंपनी करीब दाे कराेड़ रुपए खर्च कर चुकी है। एक बार पाइप लाइन सुधारने अाैर वापस लाइन में पानी भरने में करीब ढाई लाख रुपए खर्च अाता है। हालांकि इससे पहले 2013 से 14 तक टेस्टिंग के दाैरान भी कई बार मुख्य पाइप लाइन फूटी थी। अब लाेग बार-बार की समस्या से मुक्ति चाहते हैं। वही कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल के निरीक्षण बाद विश्वा कंपनी पाइप लाइन में सुधार के लिए तीन प्रस्ताव बना रही है। जिस स्थान पर लाइन फूट रही है वहां कांक्रीटिंग की जाए या संबंधित क्षेत्र की पाइप लाइन काे डीई में बदला जाए अाैर पूरी पाइप लाइन ही डीआई की बिछा दी जाए। 

 

इनकी माैजूदगी में हाे गई गड़बड़ी 
10 फरवरी 2009 काे निविदा खाेलते समय तत्कालीन महापाैर स्वर्गीय वीरसिंह हिंडाेन, विधायक देवेंद्र वर्मा, मांधाता विधायक स्वर्गीय लाेकेंद्र सिंह ताेमर, पूर्व विधायक स्वर्गीय हुकुमचंद यादव, परिषद अध्यक्ष अनिता गुप्ता, एल्डरमैन हरीश काेटवाले सहित परिषद सदस्य माैजूद थे। इस अवसर पर याेजना में डीअाई की बजाए जीअारपी लाइन का प्रस्ताव लाने वाली विश्वा कंपनी की दर स्वीकृत कर दी। विश्वा ने याेजना की लागत 115.32 कराेड़ बताई थी जबकि रैमकी हैदराबाद ने 159.49 कराेड़ लागत डीअाई पाइप के साथ प्रस्तावित की थी। लागत अधिक हाेने कारण रैमकी, सुभाष प्राेजेक्ट एंड मार्केंटिंग बैंगलाैर व एमएसके प्राेजेक्ट बड़ाैदा के प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिए गए। 

 

इसलिए बनी थी याेजना 
पारंपरिक जल स्राेत सुक्ता करीब 51 साल पुराना है। जनसंख्या बढ़ने अाैर शहर का विस्तार हाेने पर हर साल गर्मी में भीषण जलसंकट की स्थिति बनती थी। निगम काे ढाई से तीन कराेड़ रुपए साल टैंकराें से पानी सप्लाय पर खर्च करना पड़ते थे। हर साल टैंकराें से पानी भरते समय दुर्घटनाएं हाे रही थी। पानी के लिए हाेने वाले झगड़े थानाें में दर्ज हाे रहे थे। सुबह से रात तक लाेग पानी के लिए भटकते दिखाई देते थे। इसलिए शहर में नर्मदा का पानी लाने की मांग उठी। तत्कालीन विधायक स्वर्गीय हुकुमचंद यादव इसके लिए प्रयासरत रहे। 17 सितंबर 2007 में राज्य स्तरीय समिति ने याेजना स्वीकृत की। भारत सरकार ने 20 मार्च 2008 काे याेजना स्वीकृत की। इसके बाद 31 मार्च 2008 काे तत्कालीन महापाैर स्वर्गीय वीरसिंह हिंडाैन की माैजूदगी में केंद्र सरकार की यूअाईडीएसएमटी याेजना के तहत 106.72 कराेड़ की याेजना काे स्वीकृति दी गई। साथ ही डीपीअार तैयार करने से याेजना पूर्ण हाेने तक मेहता एंड एसाेसिएट्स इंदाैर की कंसलटेंसी की दर याेजना लागत की 1.5 प्रतिशत के साथ ही सर्विस टैक्स की स्वीकृति दी। 2 अप्रैल 2008 काे कलेक्टर की अध्यक्षता में तकनीकी समिति की बैठक में काम जननिजी भागीदारी याेजना अंतर्गत कराए जाने के लिए निर्णय लिया। इसके अनुसार पाइप लाइनाें का संधारण निविदाकार द्वारा किया जाएगा। 

 

एक साल से अधिक समय तक निविदा प्रक्रिया चली
एक साल से अधिक समय तक निविदा प्रक्रिया चली। इस दाैरान विभिन्न संशाेधन किए। 5 िसतंबर 2009 काे समाप्त हुई। चार कंपनियाें की तकनीकी एवं वित्तीय निविदा खाेलने के बाद विश्वा इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेस प्रा.लिमिटेड हैदराबाद अाैर इलेक्ट्राे स्टील कास्टिंग लिमिटेड कलकत्ता के ज्वाइंट वेंचर विश्वा इंफ्रा स्ट्रक्चर के पक्ष में कार्य अादेश जारी हुअा। 

 पहली निविदा 17 अप्रैल 2008 काे बीअाेटी अंतर्गत बुलाई। 16 अप्रैल 2008 काे शुद्धि पत्र 2 में अन्य संशाेधन के साथ इसे पीपीपी कर दिया। 
 याेजना में 80% राशि केंद्र सरकार, 10% राज्य अाैर 10% निगम काे लगानी थी। याेजना काे पीपीपी माेड में करने पर नगरीय प्रशासन विकास विभाग ने 19 दिसंबर 2008 काे 10% राशि जमा करने की छूट दी। 

पाइप घटिया नहीं, एग्रीमेंट अनुसार नहीं हाे रहे काम- प्रवीण कुमार 
विश्वा के प्राेजेक्ट मैनेजर प्रवीण कुमार ने बताया कि पाइप घटिया नहीं है। याेजना के लिए 93 लाख रुपए ही फंड स्वीकृत हुअा था। डीअाई में जाने पर 130 कराेड़ से अधिक लगता। जीअारपी में ही 115 कराेड़ लगे। डीपीअार के अनुसार शहर में पंप हाउस नहीं था। इसका काम कराने में 6 कराेड़ से अधिक लगे। दाे बार दस्तावेज दिल्ली की टीम चेक कर चुकी है, काेई गड़बड़ी नहीं मिली। जहां समस्या अा रही है वहां पाइप बदलने के लिए प्रस्ताव बना रहे हैं। एग्रीमेंट के अनुसार काम नहीं हाे रहा है। 


यह थी याेजना 
शहर से 52 किमी दूर इंदिरा सागर परियाेजना के बैकवाॅटर चारखेड़ा के पास छाेटी तवा नदी से 750 एमएम व्यास के डीआई के 9 पाइप से शहर तक पानी लाना था। वहीं पर इंटकवेल, वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट 56 एमएलडी क्षमता, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन और शहर में 10 ओवर हेड टैंक बनाना थे। शहर में 24 घंटे पानी मीटर लगाकर वितरित करना था। 25 साल तक संचालन और संधारण निविदाकार काे करना था। 
 

घंटाघर क्षेत्र में गुरुवार रात पूर्व पार्षद नारायण नागर ने पाइप लाइन जोड़ने के लिए खुदाई कर रहे कर्मचारियों से कहा पाइप में पानी नहीं आ रहा है फिर क्यों सड़क खोद रहे हैं। मजदूरों ने काम रोक दिया। भाजपा पार्षद सोमनाथ काले व सुनील जैन ने कहा बेवजह लोग कार्य में बाधा डाल रहे हैं। 

 

कंपनी ने घटिया पाइप लगाए हैं। इसी कारण बार-बार लाइन फूट रही है या लाेग फाेड़ देते हैं। इससे शहर की व्यवस्था बिगड़ रही है। पाइप लगाने में कितनी आर्थिक अनियमितता की गई, इसकी जांच कराएंगे। इसके बाद एफआईआर दर्ज कराएंगे।

हिमांश सिंह, आयुक्त, नगर निगम 

 

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