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पहले घुटनों पर कपड़े बांधकर चलती थीं, अब व्हीलचेयर से घूमेंगी

Badwani News - नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के समझौते कराने के अलावा जरुरतमंद दिव्यांग महिलाओं को व्हीलचेयर भी दी गई। जिला...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:10 AM IST
Palsud News - previously used to wear clothes on knees now it will move from wheelchair
नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के समझौते कराने के अलावा जरुरतमंद दिव्यांग महिलाओं को व्हीलचेयर भी दी गई। जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र से पेरालिगल वालेंटियर को जोड़ा गया है।

शनिवार को न्यायाधीश रामेश्वर कोठे, कलेक्टर अमित तोमर व अन्य अधिकारियों ने दिव्यांग महिलाओं को व्हीलचेयर उपलब्ध कराई। व्हीलचेयर पाकर दिव्यांग श्याणीबाई सिलावद व माईनीबाई पखाल्या खुश हो गई। उन्होंने कहा- पहले घुटने पर कपड़े बांध चलती थी। अब व्हीलचेयर से बिना दर्द के हम घर, आंगन व बाहर जा सकेंगी। न्यायाधीश कोठे, कलेक्टर तोमर, एसपी खत्री व न्यायाधीशों ने उन्हें व्हीलचेयर उपलब्ध कराई। दिव्यांगों को उपकरण दिलाने में पेरालिगल वालेंटियर नीता दुबे, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के मणीराम नायडू आदि का सहयोग रहा।

व्हीलचेयर पर बैठीं श्याणीबाई।

व्हीलचेयर पर बैठीं माईनीबाई।

इधर...विवाद में तीन माह से अलग रह रहे दिव्यांग दंपती फिर हुए एक

बड़वानी | जिला व तहसील न्यायालयों में शनिवार नेशनल लोक अदालत लगाई। इसमें न्यायाधीशों ने परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से 11 दंपतियों को मिलवाया। इंदौर निवासी कालू बंजारा प|ी ललिता निवासी पलसूद के साथ आए दिन विवाद करता था। इसके चलते तीन महीने से महिला दिव्यांग बच्चे के साथ पिता के घर रह रही थी। महिला ने इसको लेकर परिवार परामर्श केंद्र में आवेदन दिया था। इस पर केंद्र के काउंसलर ने दंपती की काउंसिलिंग की फिर से एक होने के लिए प्रेरित किया।

पानवाड़ी मोहल्ला निवासी नसीम खान का निकाह एक साल पहले शकील खान निवासी न्यू पानवाड़ी मोहल्ला के साथ हुआ था। पारिवारिक विवाद में दोनों निकाह के 12 दिन बाद अलग रहने लगे थे। एक साल बाद काउंसलर एएसआई रेखा यादव, पेरालिगल वालेंटियर सरदारसिंह बघेल ने काउंसिलिंग की। दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर कभी विवाद नहीं करने की कसम खाई। आलीबाई व जीवा मेघवाल भी आपसी विवाद के कारण साथ नहीं रह रहे थे। इसके चलते उनके भाई गंगाराम की प|ी बबलीबाई पति को छोड़कर मायके चली गई थी। महिला का पति 8 माह के बच्चे को ले गया था। न्यायाधीशों की सलाह पर दोनों परिवारों ने मनमुटाव दूर कर घर बसाने की सहमति दी। कठोरा के किसान खुश्याल मांगीलाल ने न्यायाधीश के समक्ष नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक के बकाया ऋण व ब्याज की 5 लाख की राशि का समझौता ढाई लाख रुपए में किया। किसान ने न्यायाधीश व कलेक्टर के समक्ष बैंक पदाधिकारियों को बतौर 5 हजार रु. जमा कराकर रसीद प्राप्त की। शहर के वरिष्ठ वकील संतोष पंडित के पुत्र सुनिल ने संपतिकर की बकाया राशि का भुगतान नपा को किया। न्यायाधीशों के समक्ष एक साल की एडवांस राशि भी जमा करवाई।

11102 में से 934 प्रकरणों का निराकरण हुआ। इससे 1607 लोगों को सीधा लाभ हुआ। प्रकरणों में 3 करोड़ 24 लाख 69 हजार 128 रुपए के अवार्ड पारित किए गए।

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