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खंडवा. शासकीय विद्यालय सिंगाेट के प्राचार्य काे 10वीं, 12वीं की बाेर्ड परीक्षा के लिए संत जाेंस हायर सेकंडरी स्कूल का केंद्राध्यक्ष बनाया था। इन्हें दाे साल पहले खरगाेन में डीपीसी रहते 4 लाख रुपए गबन के मामले में दोषी पाया गया। इसके बाद लाेक शिक्षण आयुक्त ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। जिला शिक्षाधिकारी ने भी प्राचार्य काे केंद्राध्यक्ष पद से तत्काल हटाकर स्कूल में दूसरा केंद्राध्यक्ष पदस्थ कर दिया। हटाए जाने से पहले केंद्राध्यक्ष पर्यवेक्षकाें काे दी जाने वाली राशि में भी हेरफेर कर गए। नए केंद्राध्यक्ष ने इस संबंध में जिला शिक्षाधिकारी काे पत्र लिखकर शिकायत की है।
क्या है मामला
जिला शिक्षा विभाग के लिपिक कपिल डाेंगरे ने बताया कि एमपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी परीक्षा 2019-20 के लिए निर्धारित परीक्षा केंद्र क्र. 562034 सेंट जाेंस उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खंडवा में कमल कुमार मंडलाेई, प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगाेट काे केंद्राध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। 2017-18 में कमल कुमार जब खरगाेन जिले में जिला स्रोत समन्वयक डीपीसी के पद पर थे, तब उन्हाेंने 4 लाख रुपए का गबन किया था। उनके तरफ से इसकी इंट्री भी कैश बुक में नहीं की गई थी।
मामले में सहायक संचालक इंदौर मनीष वर्मा काे जांच साैंपी गई थी। जांच में कमल कुमार दाेषी पाए गए। जांच रिपाेर्ट मिलने के बाद 4 मार्च 2020 काे आयुक्त लाेक शिक्षण संचालनालय जयश्री कियावत ने गबन के मामले में कमल कुमार काे अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी और जिला शिक्षाधिकारी काे आदेश दिए कि उन्हें तत्काल प्रभाव से केंद्राध्यक्ष के पद से हटाकर उनके स्थान पर दूसरा केंद्राध्यक्ष रखा जाए।
यहां पर भी कर गए हेराफेरी
कमल कुमार के स्थान पर केंद्राध्यक्ष बनाई गई शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय की शिक्षिका रश्मि सातले ने जिला शिक्षाधिकारी काे पत्र लिखकर शिकायत की, कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद कमल कुमार की तरफ से परीक्षा राशि के केवल 60 हजार रु. ही दिए गए, जबकि विभाग से उन्हें 82 हजार 375 रु. मिले थे। मात्र दाे दिन में 31 पर्यवेक्षकाें काे 100-100 रुपए के हिसाब से भुगतान करने पर भी 22 हजार 375 खर्च नहीं हाे सकते।
अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा का यह है फार्मूला
कमल कुमार मंडलाेई खंडवा में एक साल पहले आए थे। इस दाैरान उनके मामले में सहायक संचालक जांच कर रहे थे। विभागीय जांच के बाद दाेष सिद्ध हाेने पर 6 जनवरी काे प्राचार्य मंडलाेई से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। सरकार का फार्मूला है कि 20 साल की सेवा या 50 साल की उम्र जिसकी हाेगी और ऐसा काेई अपराध पाया जाता है ताे उसकी सेवानिवृत्ति हाे जाएगी। शासन ने अभी केवल दंडित किया है। इसके बाद शासन की तरफ से सेवानिवृत्ति के आदेश निकाले जाएंगे।






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