जुनून / रीढ़ की हड्‌डी में हुआ फ्रैक्चर, डेढ़ साल दर्द झेला, 10 सेकंड में जीत लाए तीसरा नेशनल गोल्ड मैडल

थाई बॉक्सिंग में गोल्ड मैडल जीतने पर रिंग से तनूज इंगले ने खुशी जाहिर की। थाई बॉक्सिंग में गोल्ड मैडल जीतने पर रिंग से तनूज इंगले ने खुशी जाहिर की।
X
थाई बॉक्सिंग में गोल्ड मैडल जीतने पर रिंग से तनूज इंगले ने खुशी जाहिर की।थाई बॉक्सिंग में गोल्ड मैडल जीतने पर रिंग से तनूज इंगले ने खुशी जाहिर की।

  • चल समारोह में ट्रैक्टर-ट्रॉली के पहिए में दबने से घायल हो गए थे थाई बॉक्सिंग के एशिया गोल्ड मैडलिस्ट तनूज 
  • डॉक्टर के रोकने पर भी किया अभ्यास, जिद से पाया मुकाम 

दैनिक भास्कर

Aug 10, 2019, 12:02 PM IST

बुरहानपुर.  "तू थक के न बैठ अभी उड़ान बाकी है, जमी नापी है, अभी आसामान बाकी है। शायर की ये पंक्तियां शाहपुर के थाई बॉक्सर तनूज इंगले पर सटीक बैठती हैं। रीढ़ की हड्‌डी में फ्रेक्चर होने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी। डेढ़ साल तक असहनीय दर्द से कराहते रहे। डॉक्टर ने कहा अब आगे नहीं खेले। फिर भी उन्होेंने दो महीने तक कड़ी मेहनत की। हैदराबाद की नेशनल स्पर्धा में उतरे और तीसरी बार नेशनल गोल्ड मैडल जीत लाए। 

 

शाहपुर निवासी 20 वर्षीय तनूज के पिता हेमंत इंगले केला ग्रुप में दीवान हैं। मां नीलिमा सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। शालेय स्पर्धा में ताइक्वांडो से तनूज की पहचान बनी। जिला आैर संभाग में गोल्ड जीतकर राज्य स्तर तक पहुंचे। इस बीच इंडियन थाई बॉक्सिंग के जनरल सेक्रेटरी संदीप सैनी की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तनूज को थाई बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया। एक महीने तक खंडवा में विशेष प्रशिक्षण देकर तैयार किया। उसी साल 2015 में पहला नेशनल गोल्ड मैडल जीतकर सैनी की उम्मीदों पर तनूज खरे उतरे। इसके बाद 2016 में सीधे एशिया स्पर्धा में खेलने पहुंचे। यहां भी तनूज ने गोल्ड मैडल जीता। 2017 में फिर नेशनल गोल्ड मैडल जीतकर आए। 

फिल्म सुल्तान देखकर मिक्स मार्शल ऑर्ट्स खेलने की ठानी 
तनूज ने फिल्म सुल्तान देखकर मिक्स मार्शल आर्ट्स खेलने का लक्ष्य बनाया। इसके लिए एक साल पहले पुणे की एकेडमी से प्रशिक्षण लेने की ठानी लेकिन सितंबर 2017 में गणेश विसर्जन चल समारोह में ट्रैक्टर-ट्रॉली के बोनट से रोड पर गिर पड़े। ट्रैक्टर के अगले पहिए के नीचे दबने से रीढ़ की हड्‌डी फ्रैक्चर हो गई। तीन महीने तक बिस्तर पर इलाज चला। इसके बाद डेढ़ साल तक दर्द से कराहते रहे। अभ्यास छूटने पर मन दुखी हुआ। सलाह पर डॉक्टर ने आगे खेलने से रोका लेकिन मन नहीं माना हल्के-फुल्के व्यायाम से अभ्यास शुरू किया। तीन महीने पहले पता चला कि अगस्त में हैदराबाद में 11वीं नेशनल थाई बॉक्सिंग स्पर्धा है। डॉक्टर की निगरानी में मई और जून में कड़ी मेहनत की। शाहपुर के एक जिम में कड़ा अभ्यास किया। 2 से 4 अगस्त तक हैदराबाद में हुई नेशनल स्पर्धा में शिरकत की। इसमें फाइनल तक पहुंचे। फाइनल में आंध्रप्रदेश के नेशनल खिलाड़ी शिवम गागरी को दो पंच मार 10 सेकंड में ही सीनियर वर्ग में गोल्ड मैडल अपने नाम कर लिया। 

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना