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ब्लाॅक में 8 हजार 292 किसानों ने कराया पंजीयन, पिछले साल का बोनस नहीं मिलने पर किसान नाराज

एक वर्ष पहले
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इस साल ई-उपार्जन योजना के तहत ब्लाॅक के 8 हजार 292 किसानों ने समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के लिए पंजीयन कराया है। क्षेत्र के 13 केंद्रों पर किसानों ने पंजीयन कराया है लेकिन समर्थन मूल्य पर होने वाली गेहूं खरीदी को लेकर इस बार किसान नाराज हैं। कमलनाथ सरकार ने पिछले बार का बोनस अभी तक किसानों को नहीं दिया है। खाद्य शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए इस साल 13 केंद्र बनाए गए थे।

बीते साल 7 हजार 618 किसानों ने समर्थन मूल्य पर पंजीयन करवाया था लेकिन 3 हजार 948 किसानों ने गेहूं बेचा था। कमलनाथ सरकार ने इन किसानों को 160 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देने की घोषणा की थी। इन किसानों को 33 करोड़ 31 लाख 48 हजार 800 रुपए से अधिक बोनस दिया जाना है लेकिन बोनस अब तक नहीं मिला। इस बार केंद्र सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1845 से 80 रुपए बढ़ाकर 1925 रुपए कर दिया है। गेहूं का समर्थन मूल्य केंद्र सरकार ने 85 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है। बीते साल किसानों से 1860 रुपए क्विंटल के भाव से खरीदी की गई थी। इस साल 1925 रुपए के भाव से गेहूं खरीदा जाएगा।

फैक्ट फाइल


2019 में 7 हजार 618 किसानों ने कराए थे पंजीयन।

2019 में 3 हजार 948 किसानों ने बेचा था गेहूं, बोनस की नहीं की घोषणा

केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में समर्थन मूल्य पर प्रति क्विंटल गेहूं का मूल्य 1840 रुपए निर्धारित किया था लेकिन कमलनाथ सरकार ने 160 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की थी। इसलिए पिछले साल 13 पंजीयन केंद्र पर 7 हजार 618 किसानों ने समर्थन मूल्य पर पंजीयन कराया था। हालांकि खरीदी केंद्रों पर 3 हजार 948 किसानों ने समर्थन मूल्य पर 2 लाख 8 हजार 218 मैट्रिक टन गेहूं बेचा। इस पर किसानों को 33 करोड़ 31 लाख 48 हजार 800 रुपए बोनस के रूप में मिलना थे लेकिन यह आज तक नहीं मिला।

13 केंद्रों पर किसानों ने कराया पंजीयन

प्रमुख रूप से दी को-आॅपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी सनावद 1111 व वृहताकार सेवा सहकारी संस्था बड़वाह में 956 किसान, सेवा सहकारी संस्था बैड़िया में 498 किसान, सेवा सहकारी संस्था काटकूट में 427, सेवा सहकारी संस्था बागोद में 488, आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था बलवाड़ा में 581, आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था बडूद में 599, दी को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी बड़वाह में 655, आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था बांगरदा में 852, आदिम जाती सेवा सहकारी संस्था कानापुर में 352, आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था जेठवाय में 563, आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था भानबरड़ में 676, सेवा सहकारी समिति भुलगांव में 534 किसानों ने पंजीयन कराया है। 13 केंद्रों पर 7148 किसानों ने गेहूं और 3742 किसानों ने चने की उपज का विक्रय करने के लिए पंजीयन कराया है।

पिछले साल 3 हजार 948 किसानों ने समर्थन मूल्य पर बेचा था गेहूं

स्त्रोत: विपणन संस्था से लिए गए आंकड़े।

03 हजार 948 किसानों का 33 करोड़ 31 लाख 48 हजार 800 रुपए का बोनस नहीं आया।


08 हजार 292 किसानों ने इस साल गेहूं के लिए कराया है पंजीयन।

208218.19 मैट्रिक टन गेहूं ब्लाॅक में खरीदा गया।

1840 रुपए से बढ़ाकर 1925 रुपए किया गेहूं का समर्थन मूल्य।


अौर इधर...गेहूं-चने के पंजीयन के साथ घटा रकबा


डिफाल्टर सोसायटी में नहीं होगी खरीदी

इस साल भी डिफाल्टर सोसायटी को उपार्जन का कार्य नहीं सौंपा जाएगा। क्षेत्र में कितने केंद्रों पर खरीदी का कार्य होगा। यह गाइड लाइन तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं इस साल भी सोसायटियों के माध्यम से ही गेहूं की खरीदी की जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि रंगपंचमी के बाद उपार्जन का कार्य शुरू हो जाएगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही है।

बीते साल समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव मिले थे मंडी में

आमतौर पर जैसे ही मंडियों में गेहूं की आवक शुरू होती है, किसानों को दाम भी अच्छे मिल जाते हैं। बीते साल मंडियों में गेहूं के दाम 2100 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। आवक बढ़ने व मांग कम होने पर दाम गिरे थे। इस बार भी अगर मंडी में किसानों को गेहूं के दाम समर्थन मूल्य से अधिक मिले तो केंद्रों की जगह मंडियों में गेहूं की आवक अधिक होगी।

महेश्वर | समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 25 मार्च से 22 मई तक चलेगी। अच्छी गुणवत्ता का गेहूं समर्थन मूल्य 1925 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाना है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के अनुसार इस साल गेहूं व चने के रकबे के साथ पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या में कमी आई है। उपार्जन प्रभारी दिनेश सेन ने बताया पिछले साल 2019-20 में 725 किसानों ने रबी सीजन की फसल उपार्जन के लिए पंजीयन करवाया था। इसमें गेहूं बिक्री के 659 व चना बिक्री के 66 किसान थे। गेहूं के लिए पंजीकृत रकबा 1532.32 हैक्टेयर व चने का 206.73 हैक्टेयर दर्ज था। इस साल गेहूं के लिए 583 किसानों ने ही पंजीयन करवाया। रकबा भी 1400.24 हैक्टेयर ही रह गया है। जबकि चने के लिए मात्र 12 किसान ही पंजीयन करवाने पहुंचे। रकबा 34.54 हैक्टेयर दर्ज किया गया।


केंद्र पर गेहूं के पंजीयन की स्थिति देखते अफसर।
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