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साड़ियों से बनाई खेत की बागड़ ताकि रंगों से डरकर जंगली सूअर ना घुसे

एक वर्ष पहले
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शुक्रवार की रात भी सायता गांव के किसान रमेश मालवीय के खेत में खड़ी केला फसल में सूअर घुसे

जंगली सुअरों के आतंक से पिछले 7 साल से नर्मदा पट्‌टी के किसान परेशान है। फसल बचाव को लेकर इन्होंने कई जतन किए, लेकिन यह नाकाम साबित हुए। झुंड में आने वाले जंगली सूअर फसलों को तबाह कर रहे हैं। वन विभाग भी इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। अब एक किसान ने नया तरीका ढूंढकर अपने खेत पर साड़ियों की बागड़ बना दी है ताकि रंगों से डरकर सूअर खेतों ना घुसे। इसका कुछ हद तक लाभ भी मिला है। लेकिन अन्य किसान अब भी रतजगा करने को मजबूर है। शुक्रवार की रात भी सायता गांव के किसान रमेश मालवीय के खेत में खड़ी केला फसल में सूअर घुसे। 25 से ज्यादा पौधे जमीन से उखाड़ दिए। किसान ने कहा 15 दिन पहले भी सूअरों ने इतना ही नुकसान किया था। रतजगा करने के बाद भी थोड़ा सा ध्यान हटते ही सूअर खेत में घुस जाते हैं।

2 लोगों पर हमला भी कर चुके हैं

माकड़खेड़ा के प्रदीप पटेल ने बताया पिछले दिनों खेत में काम करने वाले मजदूर पर जंगली सूअर ने हमला कर दिया था। जिला अस्पताल में 3 दिन तक इलाज करवाया। लेकिन वन विभाग के अधिकारी सुध लेने तक नहीं आए। डोंगरगांव के नानूराम यादव ने बताया गांव के एक किसान को दिन के समय जंगली सूअर ने पैर में काट लिया। कसरावद अस्पताल से इंदौर रैफर किया। नुकसानी रोकने के लिए वन विभाग व प्रशासन को उच्च स्तर पर निर्णय लेना चाहिए।

हम केवल पुष्टि करते हैं

- सचिन सयदे, रेंजर

फसल नुकसानी को लेकर परेशान,फसल बचाने के लिए किसान कर रहे कई जतन

खेत के आसपास साड़ियों की बागड़ लगाई। इनसेट में सुअरों ने केले के पौधे उखाड़ दिए।

20 से 25 की संख्या में जंगली सूअर आते हैं

बाेथू के नयनसिंह सिसोदिया व सज्जनसिंह तंवर ने बताया 20 से 25 की संख्या में जंगली सूअर आते हैं। पहले खेतों में अलाव व मसालें जलाई। थाली बजाई। फिर भी इन्हें रोक नहीं पा रहे हैं। यह आलू, भिंडी, गेहूं, मूंगफली, गन्ना, केला, चना आदि फसलों को आए दिन नुकसान पहुंचा रहे है। वन विभाग को कई बार समस्या बताई, लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही है।

खेत के चारों ओर लगाई साड़ियां

माकड़खेड़ा के सरपंच नारायण वर्मा व देवराम खेड़े ने कहा हर मौसम की फसल को जंगली सूअर प्रभावित कर रहे हैं। इनके डर से कई किसानों ने मक्का व मूंगफली फसल लगाना कम कर दिया है। केला व गन्ना फसल लगाते है तो इन्हें भी नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं कई किसानों ने अपनी फसलें अन्य किसानों को खेती के लिए दे दी है या बुवाई करना छोड़ दिया है। क्योंकि नुकसान पहुंचाने के बाद आय होना तो दूर लागत भी नहीं निकल पाती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए बड़गांव के किसान धर्मेंद्र मेवाड़े ने खेत में लगी मक्का फसल के चारों ओर साड़ियां लगाई है। किसान ने बताया रात के अंधेरे में साड़ियां की चमक देखने पर जंगली सूअर खेत में नहीं घुसते। इसके अलावा रखवाली भी कर रहे हैं।
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