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खांडेराव महाराज के जयकारों के बीच बड़वे का कांधा लगते ही दौड़ पड़े एक-दूसरे से बंधे 7 गाड़े

एक वर्ष पहले
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होलिका दहन के बाद धुलेंडी व दूज पर नगर सहित क्षेत्र में गाड़ा खिंचाई के आयोजन हुए। धुलेंडी के दिन भवानी माता चौक और शुक्रवार को शिवाजी बाजार चौक पर यह आयोजन हुआ। 126 साल पुरानी इस परंपरा को देखने श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। लोगों ने खांडेराव महाराज के जयकारे लगाए। जयकारों के बीच बड़वे का कांधा लगते ही एक-दूसरे से बंधे गाड़े दौड़ पड़े। बुधवार शाम शाहबाद मोहल्ला स्थित प्राचीन श्री हनुमान मंदिर में बड़वा मंगत पटेल ने पूजन किया। बड़वा के शरीर में खांडेराव महाराज की सवारी आते ही श्रद्धालुओं ने उन्हें कंधों पर बैठाया और गाड़े खींचने के स्थान तक ले गए। कांधा लगाते ही 7 गाड़ियां दौड़ पड़ी। मंगलवार शाम भवानी माता मंदिर परिसर में बड़वा शेरू यादव ने यह परंपरा निभाई। उन्होंने आयोजन से पहले 7 दिनों तक खांडेराव बाबा की आराधना की। अखंड ज्योत जलाई। शाम को श्रद्धालु उन्हें कांधे पर बैठाकर लाए। कन्हेर की सोटी घुमाते हुए लकड़ी की ऊंची मकड़ी को तीन बार घुमाया। पहाड़ी पर स्थित पीर बाबा को सलाम दुआ की। महिलाओं ने गाड़े के पहियों को हल्दी लगाई। गाड़ा स्थल पहुंचने के बाद उसकी धुरी को बड़वे ने जैसे ही कांधा लगाया वह 3 मिनट में करीब 300 मीटर तक दौड़ पड़े।

परिक्रमा के बाद धुरी पकड़ी और चल पड़े गाड़े

घुघरियाखेड़ी | धुलेंडी पर शिव मंदिर परिसर में गाड़ा खिंचाई की परंपरा निभाई गई। बड़वा राकेश यादव ने गाड़े खींचे। शाम 6.45 बजे बड़वे को खांडेराव महाराज के जयकारों और डमरू-नगाड़े बजाते मंदिर परिसर लाया गया। 7 गाड़ों की परिक्रमा के बाद धुरी को पकड़ते ही गाड़े चलने लगे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग गाड़ों पर सवार थे। इस परंपरा से पहले उपवास रख बड़वे ने खांडेराव की आराधना की। इस दृश्य को देखने गोगावां, खारदा, टेमरनी, टेमा, बमनाला, खरगोन, बड़गांव, नागझिरी, गोवाड़ी आदि गांव के श्रद्धालु दोपहर से पहुंचने लगे थे। सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रही।

दोगावां में 1-1 क्विंटल के 9 गाड़े खींचे

क्षेत्र के दोगावां में भी बुधवार को यह परंपरा निभाई गई। सरपंच धनु सुरेशचंद्र गोखले व सचिव योगेश बामने ने बताया विधिपूर्वक पूजन के बाद बड़वा जयप्रकाश वर्मा ने एक-एक क्विंटल वजनी 9 गाड़े खींचें। इस परंपरा को देखने रणगांव, काकरिया, लेपा, सामेड़ा, मिर्जापुर, बाड़ी, पीपलगोन, माकड़खेड़ा, मोगावां, कोगावां आदि स्थानों के श्रद्धालु पहुंचे। यहां एक दिनी मेले का आयोजन हुआ। विभिन्न दुकानें सजी। बच्चों ने खिलौने व महिलाअों ने सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री खरीदी। रात में कलगी-तुर्रा का आयोजन हुआ। कलगी पार्टी के रामेश्वर कर्मा भानपुरा व तुर्रा पार्टी के संजय मेवाड़े चोली ने देर रात तक समा बांधा।

126 साल पुरानी परंपरा को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी

फाग गीतों पर दी नृत्य की प्रस्तुति, बड़ों का लिया आशीर्वाद

सनावद | शहर के आदि गौड़ मारवाड़ी ब्राह्मण समाज महिला मंडल ने फागुन मास पर फाग उत्सव मनाया। कार्यक्रम में महिलाओं ने फाग गीतों पर नृत्य की प्रस्तुतियां दी। महिलाओं ने फूलों और सूखे रंगों गुलाल से होली खेलकर जल संरक्षण का संदेश दिया। फाग उत्सव में परिवार में संबंधों में प्रगाढ़ता स्थापित करने के लिए सास, बहू, ननंद, भाभी, देवरानी जेठानी ने एक दूसरे को प्रेम स्नेह का रंग लगाकर उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया। शकुंतला शर्मा ने कहा परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है। जिसके सभी सदस्य आपस में मिलकर अपना जीवन प्रेम, स्नेह व भाईचारा पूर्वक निर्वाह करते हैं। संस्कार, मर्यादा, सम्मान, समर्पण, आदर, अनुशासन किसी भी सुखी संपन्न व खुशहाल परिवार के गुण होते हैं। उत्सव में महिलाओं ने पारंपरिक व्यजनों का लुफ्त उठाया ।

शिवाजी बाजार में बड़वा मंगत पटेल ने परंपरा निभाई। बड़ी संख्या में लोग गाड़ों पर सवार थे।
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