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1935 में पूर्ण आजादी का सपना देखा लेकिन 1947 में खंडित आजादी लेकर हुए खुश

एक वर्ष पहले
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वर्तमान में राष्ट्र के सामने कई प्रकार की चुनौतियां है। 1935 में पूर्ण आजादी का संकल्प क्रांतिकारियों ने लिया लेकिन 1947 में खंडित आजादी को हमारा भाग्य माना। मेकाले की शिक्षा पद्धति ने हमें गुलाम बना रखा है। ग गणेश के स्थान पर ग गधा पढ़ाया जा रहा है।

लव जिहाद द्वारा षड्यंत्रपूर्वक माता-बहनों को प्यार के जाल में फंसाकर जिहाद का शिकार बनाया जा रहा है। देश की सीमाएं तो सुरक्षित हैं लेकिन देश के अंदर के गद्दारों को पहचानना होगा। मां रेवा व्याख्यान माला समिति के दो दिनी व्याख्यानमाला के पहले दिन राष्ट्र के समक्ष वर्तमान चुनौतियां विषय पर मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोजक डॉ. सुब्रतो गुहा इंदौर ने यह बात कही। परमजीत राजपाल ने स्वामी अमूनंदपुरी के बारे में जानकारी दी। प्रतिभा सम्मान में नगर के आयुष कुंडल व तरुण लोठ को समिति की ओर से मंगला चौहान, पूजा राठौर व सोनाली पंवार ने सम्मानित किया। इस दौरान रुद्रा आंवले, प्रगति शर्मा, महेंद्र अमई, जितेंद्र सेन, हेमचंद खंडेलवाल, दिलीप भंडारी, रोहित बंसल, चेतन साहू, गणेश चौधरी, डॉ. ओपी टेगर, अर्चना पंवार, मोहित वर्मा, श्रेयांस जैन, महेंद्र लोठ सहित बड़ी
संख्या में श्रोता मौजूद थे।

डॉ. सुब्रतो गुहा

व्याख्यानमाला में उपस्थिति लोग।
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