5वें साल भी जीती गिर नस्ल की गाय तो जाफरावादी भैंस की पहली जीत

Khargon News - भारतीय देशी नस्ल की अधिकतम दूध उत्पादन देने वाली गाय व भैंस के लिए विकासखंड स्तरीय गोपाल पुरस्कार प्रतियोगिता...

Nov 17, 2019, 06:36 AM IST
Badwah News - mp news even the cow of the gir breed who won the 5th year and the first victory of the jaffarad buffalo
भारतीय देशी नस्ल की अधिकतम दूध उत्पादन देने वाली गाय व भैंस के लिए विकासखंड स्तरीय गोपाल पुरस्कार प्रतियोगिता शनिवार को हुई। इसमें राजपुर से खरीदी जाफरावाद नस्ल की भैंस जमुना ने सर्वाधिक 13.830 लीटर दूध देकर पहला पुरस्कार प्राप्त किया। वहीं पिढाय खुर्द के सोनू लीलाधर की गिर नस्ल की गाय काशी ने 11.110 लीटर दूध देकर पहला स्थान हासिल किया। ब्लॉक स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में पांच साल से लगातार गिर नस्ल की गाय ही जीत हासिल कर रही है। वहीं दो साल से हो रही भैंस की प्रतियोगिता में पहली बार जाफरावादी नस्ल की भैंस ने जीत हासिल की है।

पशु चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बाबूलाल जैन ने कहा खेती के साथ पशुपालन अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकता है। प्रदेश के मुखिया कमलनाथ ने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रहे हैं। समाजसेवी व लेखक मनोहर मंजुल ने कहा पशुओं के लिए बाजार में कई प्रकार की दवाएं मिल रही है यदि पशु एक दिन चारा नहीं खाता है तो पशु पालक पशु अस्पताल चले जाते हैं। पूछते हैं हमारी गाय चारा नहीं खा रही। दूध नहीं दे रही। क्या कारण है। इससे जागरुकता आई है। यह सबसे बड़ी बात है। विशेष अतिथि डोंगर खंडाला, संजय गुप्ता, प्रवीण शर्मा, कृष्णगोपाल दांगी, डॉ. हरीश बढोले, विमल दांगी, आसाराम ठाकुर, प्रदीप सेठिया, अमरसिंह उपस्थित थे। विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश बघेल ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए पूरी योजना को विस्तार से समझाया। सर्वाधिक दूूध देने वाली तीन गोपालकों व तीन भैंस पालकों को उपस्थित अतिथि ने 10 हजार, साढ़े 7 हजार, 5 हजार रुपए और प्रमाण पत्र दिए। इस दौरान पशु चिकित्सक सर्जन डॉ. किशन सेप्ता, डॉ. जितेंद्र सेते सहित किसान मौजूद थे।

गिर नस्ल की विजेता गाय को सम्मानित करते अतिथि।

66 गायों और 77 भैंसों ने लिया था गोपाल पुरस्कार प्रतियोगिता में हिस्सा

पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी डॉ. सुरेश बघेल ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए 65 गोपालकों और 77 भैंस के आवेदन आए थे। इनमें से 10-10 गोपालकों की गाय व भैंस का चयन किया। इसके बाद 7 गाय और 6 भैंस के गोपालक उन्हें लेकर महेश्वर रोड स्थित पशु चिकित्सालय में पहुंचे। शुक्रवार को सुबह शाम व शनिवार को सुबह गाय व भैंस का दूध निकाला गया। इस दौरान विनोबा मार्ग बड़वाह के गोपालक बद्रीलाल शंभू की गिर नस्ल की गाय गंगा ने 9.95 लीटर दूध देकर द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। मेहताखेड़ी के गोपालक राजेंद्र देवराम की गाय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पीड़ाय खुर्द के प्रवीण लीलाधर की जाफरावादी भैंस ने 11.876 लीटर दूध देकर द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। दौपलपूरा के सुजीत सुरेंद्र जाट की मुर्रा भैंस ने 11.218 लीटर दूध देकर तृतीय स्थान प्राप्त किया।

जाफरावादी नस्ल की विजेता भैंस को सम्मानित करते अतिथि।

यह है जाफरावादी भैंस और गिर गाय की खासियत

गिर गाय : गिर गाय की पहचान आमतौर पर लंबे कान, बड़ा सिर, लटकती हुई चमड़ी है। यह गाय गुजरात राज्य में अधिक पाई जाती है। जिसे अब मप्र में भी अधिक लोग खरीदकर पाल रहे हैं। इस नस्ल की गाय एक दिन में दोनों समय मिलाकर करीब 14 लीटर दूध देती है। जो इसकी खासियत है।

जाफरावादी भैंस : जाफरावादी भैंस की नस्ल हरियाणा और राजस्थान में पाई जाती है। इसकी मुख्य पहचान झुके हुए लंबे सिंग है। ऊंचाई अधिक होने के साथ ही यह तगड़ी देह की होती है। इस नस्ल की भैंस एक दिन में दोनों समय मिलाकर करीब 18 लीटर दूध देती है। जो इसकी खासियत है।

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