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पौष्टिक के साथ स्वास्थ्यवर्धक है, इसलिए लगाया काला गेहूं

एक वर्ष पहले
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जिले में काला गेहूं की ओर अब किसानों का रुझान बढ़ रहा है। इस बार पानसेमल के किसान अरूण पिता रमेशचंद्र अग्रवाल ने 3 एकड़ में श्याम कनक गेहूं बोया है। अग्रवाल ने बताया श्याम कनक गेहूं पौष्टिक है। पिछले साल खरगोन में इसकी जानकारी मिली थी। खरगोन के एक किसान से 100 किलो बीज खरीदा।

उन्होंने बताया नवंबर महीने में 3 एकड़ में काला गेहूं लगाया था। मार्च महीने में कटाई होगी। प्रति एकड़ 12 से 15 क्विंटल उत्पादन होने का अनुमान है। उन्होंने बताया पाैष्टिक होने के साथ श्याम कनक गेहूं स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। लोगों को स्वास्थ्यवर्धक गेहूं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया है। जैविक व रासायनिक मिश्रित खेती की है, ताकि उत्पादन बेहतर मिले। इसका भूसा भी पशुओं के लिए स्वास्थ्यवर्धक है।

ये हैं खासियत

काले गेहूं में एंथ्रोजाइनीन के अलावा जींक, आयरन, प्रोटीन डायट्रीफाइबर्स की मात्रा भी सामान्य गेहूं की तुलना में अधिक पाई जाती है। इसका स्वाद व इसकी भंडारण क्षमता सामान्य गेहूं की तरह ही आसान है। इसकी रोटी का रंग कुछ हद तक बाजरे की रोटी के समान होता है। नेशनल एग्रीफुड बायोटेक्नालॉजी मोहाली (पंजाब) के वैज्ञानिकों की टीम ने वैज्ञानिक डॉ. मोनिका गर्ग की अगुवाई में काले गेहूं को भारतीय गेहूं से नार्मल प्लांट ब्रिडिंग द्वारा भारतीय पर्यावरण के अनुकूल श्याम कनक (काला गेहूं) की प्रजाति को विकसित करने में सफलता हासिल की है।

पानसेमल. काले गेहूं के पौधे देखते किसान अरूण अग्रवाल। 94240- 57807
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