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होली हमारे मन की सफाई का है त्योहार-दीदी

एक वर्ष पहले
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बड़वाह | हम हमारे मन में सदविचारों का ऐसा रंग चढ़ाए। जिससे नकारात्मक विचार हमारे जीवन को प्रभावित न कर पाएं। होली अर्थात जो बातें बीत चुकी है उन्हें पकड़कर हम ना बैठे। आगे आने वाले स्वर्णिम भविष्य के लिए मेहनत करें।

सभी के लिए सदैव शुभभावनाएं रखे व सभी को सुख देने का भाव हो। ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर होली पर्व मनाते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनिता बहन ने होली का आध्यात्मिक रहस्य सुनाते हुए कहा। उन्होंने कहा होली हमारे मन की सफाई का त्योहार है। भक्तराज प्रहलाद की पावन कथा का स्मरण कराता यह पर्व राधा कृष्ण के दिव्य प्रेम व संपूर्ण जगत के लिए उमंग उल्लास को प्रदान कराने वाला पर्व भी है। होलिका दहन अचेतन मन में ना जाने कितनी इच्छाएं, कितने प्रदूषित विचार कितनी ईष्याएं अंदर ही अंदर चेतना को बोझिल, प्रदूषित व परेशान करती रहती है। होली का यह उत्सव आज हमें वह अवसर उपलब्ध कराता है। जब हम अपने अंदर जमा इस कूड़े कचरे को बाहर निकालकर अपनी चेतना को हल्का व निर्मल बनाए।
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