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मार्च में शुरू होने वाले पावर प्लांट से चार माह बाद भी नहीं हो रहा बिजली उत्पाद

2 वर्ष पहले
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सेल्दा स्थित एनटीपीसी के थर्मल पावर प्लांट से इस साल मार्च में बिजली उत्पाद का काम शुरू होना था लेकिन करीब 4 माह अधिक बीतने के बाद भी अब तक बिजली उत्पादन का काम शुरू नहीं हुआ है। प्लांट के निर्माण कार्य में हो रही लेटलतीफी के चलते प्रदेश सहित अन्य हिस्सों में बिजली देने का काम भी नहीं हो पा रहा है। प्लांट के लिए डाली गई रेलवे लाइन के लिए कई स्थानों पर पुल का निर्माण होना है जो अभी भी अधूरे पड़े हुए है। जिससे रेल लाइन से कोयला लाने का काम भी शुरू नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में जब एनटीपीसी के अफसरों से लेटलतीफी का कारण पूछा तो वह बताने में टालम टोली करते नजर आए।

सेल्दा स्थित थर्मल पावर प्लांट का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसका काम अंतिम दौर में चल रहा है। इसके लिए निमाड़ खेड़ी से सेल्दा तक रेलवे लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है। इसके बाद भी बिजली उत्पाद का काम शुरू करने में एनटीपीसी देरी कर रही है। एनटीपीसी के अफसरों का कहना है कि प्लांट का काम लगभग पूरा हो चुका है। आगामी महीनों में बिजली का कमर्शियल उपयोग शुरू कर दिया जाएगा।

650 एकड़ में बन रहा, 9870.51 करोड़ रुपए है लागत

अफसरों का दावा-निर्माण कार्य पूरा, अगले माह से शुरू कर देंगे

गांव में न तो सुविधाएं दी और न ही रोजगार मिला

एनटीपीसी द्वारा प्लांट निर्माण के तहत सेल्दा गांव को गोद लेकर उसका विकास करना था लेकिन एनटीपीसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों ने बताया नियमानुसार एनटीपीसी द्वारा पूरे गांव में सड़क बनाकर ड्रेनेज की व्यवस्था करना था। इसके साथ ही स्ट्रीट लाइन व अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाने थे लेकिन अब तक ग्रामीणों को सुविधा नहीं दी गई है। सेल्दा गांव के मुख्य मार्ग पर हमेशा पानी भरा रहता है। जिसके कारण गांव में गंदगी फैल रही है। भारी वाहनों के गुजरने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को अधिक संख्या में रोजगार देने के लिए भी ग्रामीणों ने मांग की है।

वाहन चालकों को हो रही

परेशानी, लग रहा जाम

निमाड़ खेड़ी से सेल्दा डालची स्थित थर्मल पावर प्लांट तक 37 किमी रेलवे लाइन बिछाई गई है। जिसके माध्यम से थर्मल पावर प्लांट तक कोयले की सप्लाय होगा। यह रेलवे लाइन इंदौर-इच्छापुर हाईवे से होकर गुजरेगी। इसके लिए एबी रोड पर ओवर हेड ब्रिज का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके लिए करीब 650 एकड़ कृषि व अन्य भूमि को अधिग्रहित की है। पुल निर्माण में देरी के चलते यहां से गुजरने वाले वाहनों को परेशानी हो रही है। अधिक वाहन गुजरने पर जाम की स्थिति बनती है।

प्लांट के सेंट्रलाइजेशन का काम पूरा हो चुका है। कमर्शियल टेस्टिंग का काम प्रगति पर है। इसकी टेस्टिंग पूरी होने के साथ ही बिजली उत्पाद कर बेचने का काम शुरू कर दिया जाएगा। अगस्त माह के अंत या सिंतबर माह में काम पूरा हो जाएगा। -जेपी सत्यकाम, एचआर हैड, एनटीपीसी सेल्दा थर्मल पावर प्लांट

ठेकेदार कर रहे अवैध उत्खनन, कार्रवाई नहीं

सेल्दा में निर्माण कार्य के लिए कई छोटे ठेकेदारों को मुरुम व अन्य माल के सप्लाय का ठेका दिया गया है। इसमें ठेकेदार द्वारा आसपास की पहाड़ियों से अवैध खुदाई का काम कर रहे हैं। इसके बाद भी प्रशासनिक तौर पर अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहीं कई स्थानों पर बिना रायल्टी दिए उत्खनन किया जा रहा है। मुरुम से भरे कई डंपर बैड़िया सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरते हैं। जिससे ग्रामीणों को दुर्घटना होने का डर बना हुआ है।

सेल्दा थर्मल पावर प्लांट एक नजर में

650 एकड़ में 9870.51 करोड़ रु. की लागत से तैयार हो रहा प्लांट।

325 एकड़ में बन रहा है एस डाइक (राख संग्रहण केंद्र)।

660 मेगा वॉट की दो यूनिट का हो रहा है निर्माण।

2019 में शुरू होगी पहली यूनिट, दूसरी सितंबर 2019 में।

4500 मजदूर कर रहे रोजाना काम। प्लांट की शुरूआत पर रोजाना करेंगे 800 मजदूर काम।

92 एकड़ में अफसर व कर्मचारियों के लिए तैयार हो रही सर्वसुविधा युक्त कॉलोनी।

70 प्रतिशत से अधिक हो चुका है प्लांट पर निर्माण।

50 प्रतिशत बिजली मप्र को दी जाएगी।

50 प्रतिशत बाकी बिजली महाराष्ट्र गुजरात छत्तीसगढ़ गोवा व दमन दीव को दी जाएगी।

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