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मानव जन्म के बाद मानवता को प्राप्त करना ही धर्म है - आचार्य प्रणामसागरजी

एक वर्ष पहले
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जैन सिद्धक्षेत्र पावागिरी में इस बार भी रंगपंचमी पर आध्यात्मिक रंगों का मेला लगा। दो दिनी मेले की शुरूआत शुक्रवार से हुई। मेले में आचार्य पुष्पदंतसागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य भक्तामर वाले बाबा आचार्यश्री प्रणामसागरजी महाराज व क्षुल्लक प्रथमसागरजी महाराज का सान्निध्य मिल रहा है। महोत्सव में सान्निध्य देने के लिए आचार्यश्री का सुबह 8 बजे गाजे-बाजे के साथ मंगल प्रवेश हुआ। आचार्यश्री ने प्रवचन में कहा मानवता का जन्म नहीं होता। जन्म केवल मानव का होता है। मानव जन्म के बाद मानवता को प्राप्त करना ही धर्म है। धर्मात्मा बनने से पहले हमें मानव बनना जरूरी है। यही यथार्थ भगवान महावीर का था। उन्होंने कहा सिद्ध क्षेत्रों में होने वाले धार्मिक आयोजनों में धर्मलाभ लेने से ही आपका जीवन सार्थक है। आप बड़े पुण्यशाली हैं जो आपको ऐसे धार्मिक आयोजनों में भाग लेने व पुण्य कमाने का अवसर प्राप्त होता है। मेला महोत्सव के तहत रंगपंचमी शनिवार की सुबह नित्य पूजन व अभिषेक के बाद विश्व शांति महायज्ञ होगा।

ध्वजारोहण के साथ महोत्सव शुरू

देवेंद्र कुमार आजाद कुमार भाई रमेश चंद्र शाह परिवार भोपाल-इंदौर ने ध्वजारोहण से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दोपहर 1 बजे से पंकज जैन एंड पार्टी इंदौर के संगीत के साथ भक्तामर मंडल विधान का आयोजन हुआ। मुख्य इंद्र क्षेत्र के वर्किंग ट्रस्टी गुलाबराव मंडलोई परिवार महेश्वर रहे। मंडलोई परिवार के साथ ही उपस्थित श्रद्धालुओं और इंद्र-इंद्राणियों ने सुमधुर भजनों पर भक्ति नृत्य करते हुए मंडल विधान में अर्घ्य समर्पित किए। अधिष्ठाता पं. धर्मचंद शास्त्री नई दिल्ली व विधानाचार्य पं. नितिन झांझरी इंदौर के निर्देशन में कार्यक्रम हुए। शाम को संगतमय आरती, शास्त्र प्रवचन के बाद जैन आर्केस्ट्रा इंदौर ने भजनों की प्रस्तुति दी। मेले को लेकर पहाड़ी मंदिर व महावीर मंदिर पर आकर्षक विद्युत सज्जा की गई।

संगीत के बीच मंडल विधान पर अर्घ्य समर्पित किए।
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