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गाड़ा खिंचाई से पहले 5 दिन से खांडोबा मंदिर में अनुष्ठान
धुलेंडी पर भवानी माता चौक में निभाई जाएगी परंपरा
होलिका दहन के दूसरे दिन धुलेंडी मंगलवार को यहां भवानी माता चौक परिसर में गाड़ा खिंचाई की परंपरा निभाई जाएगी। आयोजन को लेकर गाड़े तैयार कर लिए गए हैं। गाड़े खींचने से पहले ओझा श्रीराम यादव खांडोबा मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। वे निराहार रहकर पूजन व पाठ कर रहे हैं। 5 दिन वे कहीं नहीं जाकर मंदिर में ही रहते हैं।
आयोजन से पहले ओझा के शरीर पर हल्दी का लेप लगाया जाएगा। शाम को उन्हें कांधे पर बैठाकर भवानी माता चौक लाया जाएगा। दोनों हाथ से लगातार कन्हेर की लकड़ी को घुमाते हुए ओझा ऊंचाई पर बनी लकड़ी की मकड़ी को तीन बार घुमाएंगे। इसके बाद एक-दूसरे से बंधे गाड़ों को खींचा जाएगा। करीब 300 मीटर दूर खड़े गांव पटेल व पटवारी के आग्रह पर गाड़े रुकते हैं। यह परंपरा शिवाजी बाजार मार्ग पर धुलेंडी के अगले दिन बड़वा मंगल पटेल निभाएंगे। क्षेत्र के दोगावां, बामंदी, भीलगांव, रामपुरा आदि स्थानों पर भी यह परंपरा निभाई जाएगी।
इधर...आज 35 स्थानों पर होगा होलिका दहन
महेश्वर | नगर में सोमवार देर रात 35 स्थानों पर होलिका दहन का कार्यक्रम होगा। लकड़ी व कंडे की होली जलाई जाएगी। महात्मा गांधी मार्ग पर होलिका को मूर्ति के रूप में आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा। मंगलवार को धुलेंडी पर विभिन्न समाजजन सुख-दुख की होली मनाएंगे। सुबह से समाजजन होली का रंग डालने निकलेंगे। पर्व को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। रविवार को फुटकर व्यापारियों से बच्चों ने सूखे रंग व पिचकारी की खरीदारी की।
महाराष्ट्र से हुई शुरूआत
ओझा यादव ने बताया गाड़े खींचने की परंपरा की शुरूआत महाराष्ट्र से हुई। नगर में ही यह परंपरा पिछले 700 साल से निभाई जा रही है। निराहार रहकर यह गाड़े खींचे जाते हैं।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
गाड़ा खिंचाई की परंपरा सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। तीन बार लकड़ी की मकड़ी घुमाने के बाद ओझा ऊंचाई से ही पहाड़ी पर स्थित हजरत बिलाल शाह वली बाबा की मजार की ओर देखते हुए दुआ-सलाम करते हैं। इसके बाद गाड़े खींचे जाते हैं।
होलिका दहन आज, वयड़ियों की माला बनाई
बोरावां | सोमवार को होलिका दहन होगा। ग्राम पटेल होलिका दहन करेंगे। ग्रामीणों ने होली के लिए अपनी इच्छानुसार कंडे दिए हैं। मन्नत अनुसार खारिक व नारियल भी चढ़ाए जाएंगे। छात्राओं ने भी तैयारी की है। कुछ दिन पहले से ही गोबर से वयड़िए बनाकर उसकी माला तैयार की है।
परंपरा निर्वहन के लिए गाड़े तैयार किए गए। इनसेट में मंदिर में ओझा यादव पाठ कर रहे हैं।