- Hindi News
- National
- UUN News Mp News Shreeji Was Enthralled In The Palanquin And Took Out A Procession
श्रीजी को पालकी में विराजित कर निकाली शोभायात्रा
पावागिरी सिद्धक्षेत्र में आयोजित दो दिनी वार्षिक मेला महोत्सव के तहत शनिवार को भगवान की प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक हुआ। महावीर मंदिर से पहाड़ी मंदिर तक शोभायात्रा निकाली गई। आचार्य पुष्पदंत सागरजी महाराज के शिष्य भक्तामर वाले बाबा आचार्य प्रणामसागरजी महाराज व श्रद्धालु शामिल हुए।
शनिवार सुबह नित्य अभिषेक, पूजन के बाद हवन व विश्व शांति महायज्ञ हुआ। आचार्यश्री ने प्रवचन में कहा पावागिरी सिद्ध की भूमि व प्राचीन प्रतिमाओं की प्रकट स्थली है। क्षेत्र के दर्शन से अपार शांति का अनुभव होता है। ऐसे क्षेत्रों की यात्रा व महोत्सव में शामिल होकर हर नागरिक को अपने पुण्य को बढ़ाना चाहिए। दोपहर में दीप प्रज्ज्वलन सुधा महेंद्र जैन परिवार सनावद ने किया। पहाड़ी मंदिर के पास शांतिनाथ उपवन का भूमिपूजन हुआ। यहां विभिन्न प्रकार के पौधे लगाएंगे। अधिष्ठाता पं. धर्मचंद शास्त्री नई दिल्ली व विधानाचार्य पं. नितिन झांझरी इंदौर के निर्देशन में कार्यक्रम हुए।
श्रीजी को पालकी में विराजित कर पहाड़ी मंदिर तक शोभायात्रा निकाली।
प्रतिमाओं का मस्तकाभिषेक किया गया।
भजन संध्या में बांधा समां
शुक्रवार की रात जैन आर्केस्ट्रा इंदौर ने भजन संध्या की। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। शाम को आचार्यश्री ने आनंद यात्रा के तहत श्रद्धालुओं को स्तुति व प्रश्नों के माध्यम से आनंदित किया। आनंद यात्रा के बाद भगवान व आचार्यश्री की आरती की गई।
मंदिर के शिखरों पर चढ़ाए ध्वज
क्षेत्र के महामंत्री अशोक झांझरी व अतुल कासलीवाल ने बताया शाम 4 बजे श्रीजी की शोभायात्रा महावीर मंदिर से शुरू हुई। बैंड बाजों के साथ समाजजन भजन गाते हुए चले। पहाड़ी मंदिर स्थित शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ भगवान की प्रतिमा, पंच पहाड़ी स्थित महावीर भगवान और स्वर्ण भद्रादि चार मुनिराजों की प्रतिमाओं का मस्तकाभिषेक किया गया। मंदिरों पर स्थित शिखरों पर ध्वज चढ़ाए गए। प्रथम अभिषेक मंजू प्रमोद जैन इंदौर ने किया। पंकज जैन इंदौर, केएल जैन इंदौर, धनपालजी खंडवा व वीरेंद्र जैन खंडवा को भी अभिषेक करने का सौभाग्य मिला। शिखरों पर ध्वजारोहण मनोज कुमार सुगंधीलाल जैन, कैलाशचंद्र जटाले सनावद, अशोक झांझरी भीकनगांव, अरुण चिरौंजीलाल पहाड़िया इंदौर, मनीष दोशी बड़वानी आदि ने किया। आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य भागचंद कासलीवाल इंदौर ने पाया। नरेशचंद्र जैन धार ने शास्त्र भेंट किया।