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उपद्रव में आंसू गैस व एयर गन चलाना नहीं आया, भारी पड़े थे उपद्रवी इसलिए एसपी ने 100 कर्मियों को दिलाया प्रशिक्षण

एक वर्ष पहले
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शहर के संजयनगर-मोतीपुरा मार्ग पर पिछले दिनों हुए उपद्रव में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मौके पर पहुंचे बल में से अधिकांश पुलिसकर्मियों को वज्र वाहन से सेल व हाथ से अश्रु गैस के गोले, एयर गन व अन्य सुरक्षात्मक उपाय करते नहीं आया। इसके चलते उपद्रवी भारी पड़े। चार घंटे तक पथराव, तोड़फोड़ व अागजनी हुई। उल्टे उपद्रवियों के हाथों पुलिस पिट गई।

पुलिस अफसरों की आरंभिक जांच में यह बात सामने आई है। इसी को देखते हुए एसपी सुनील पांडेय ने पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए। उपद्रव के बाद से शहर में शांति है लेकिन अभी भी 50 से ज्यादा पाइंट्स पर पुलिस बल तैनात है। इस बीच गुरुवार को डीआरपी लाइन मैदान में 100 पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण हुआ। एसडीओपी ग्लेडविन ई कार ने यहां बारी-बारी से पुलिस जवानों को अश्रु गैस व एयर गन चलाने के तौर तरीके बताए गए। एसडीएम अभिषेक गेहलोत ने भी प्रशासनिक जानकारी व वाहन चालकों को भी यह प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में शामिल कई पुलिसकर्मियों को 9 माह की ट्रेनिंग के बाद पहली बार उपकरणों संबंधी जानकारी मिली। इस दौरान आरआई रेखा रावत, रवि गोयल सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे।

एक जैसे सेल दिखने से हुई गलती

अफसरों ने माना है कि पिछले दिनों हुए उपद्रव के दौरान पुलिस से चूक हो गई। सारे सेल दिखने में एक जैसे थे। उनके बॉक्स भी एक जैसे थे। पुलिस जवानों ने इलेक्ट्रिक सेल का उपयोग फेंकने में कर दिया। एयरगन के सेल को वज्र वाहन में इस्तेमाल कर दिया। इससे आंसू गैस छूटे नहीं और उपद्रवी देरी से काबू में आए। उनका मानना है पुलिस को नौ माह के प्रशिक्षण में अश्रु गैस, एयर गन सहित अन्य सुरक्षात्मक हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

- सुनील पांडेय, एसपी खरगोन

कई पुलिसकर्मियों को 9 माह की ट्रेनिंग के बाद पहली बार मिली उपकरणों की जानकारी

सरकारी वाहन से अलग रहें, उग्र भीड़ उन्हें निशाना बनाती है : एसडीएम

एसडीएम अभिषेक गेहलोत ने समझाया कि उपद्रव की स्थिति में ड्राइवर सरकारी वाहन को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करवाएं। ड्राइवर या अन्य कोई भी पुलिसकर्मी वाहन में नहीं होना चाहिए। कई बार यह बात सामने आती है कि भीड़ के उग्र होने पर वे पुलिस के वाहनों को निशाना बनाती है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को कानून के दायरे में रहकर भीड़ से निपटना चाहिए।

जानिए... 100 मीटर या ज्यादा दूरी

पर किस सेल का प्रयोग जरूरी

इलेक्ट्रिक सेल : इलेक्ट्रिक सेल का उपयोग वज्र वाहन मंे करना होता है। वज्र वाहन के ऊपरी हिस्से मंे यह सेल लगाया जाता है। इसके बाद तय दिशा व एंगल में फायर किया जाता है। 100 मीटर दूरी पर फायर किया जाता है।

लांग टीयर सेल : इसका उपयोग 100 मीटर से ज्यादा की दूरी के लिए होता है। इसमें एयर गन में भरकर छोड़ते हैं। तेज आवाज के साथ नीचे गिरती है।

शाॅर्ट टीयर सेल : शाॅर्ट टीयर सेल का उपयोग कम दूरी के लिए किया जाता है। इसे एयर गन से कम दूरी पर तय स्थान पर फेंका जाता है।

डाय मारकर अमिट : डाय मारकर अमिट (ग्रेनेड) में तेज आवाज के साथ ही कलर छूटता है। कलर से बलवाइयों की पहचान हो जाती है। उपद्रव मंे निर्दोष या पुलिसकर्मियों का बचाव हो जाता है। (रक्षित निरीक्षक सेल के मुताबिक)

प्रशिक्षण में चूके कई जवान, दोबारा सिखाया

प्रशिक्षण में कई जवानों को हथियारों का उपयोग करना नहीं आया। उन्हें समझाइश देकर दोबारा सिखाया गया। हालांकि पुलिस ट्रेनिंग में नौ माह तक हथियार चलाने व आंसू गैस का प्रशिक्षण दिया जाता है। उपद्रव कई महीनों में होने से पुलिस जवानों के उपयोग करने में चूक हो जाती है।

एसडीओपी ने सिखाया- 45-60 डिग्री पर अश्रु गैस छोड़ना बेहतर

एसडीओपी ने बताया कि उपद्रव या दंगे जैसी स्थिति से निपटने के लिए ड्राइवर से लेकर एसपी तक को हथियार चलाते आना चाहिए। अश्रु गैस छोड़ने में उसका तरीका व ऐंगल महत्वपूर्ण है। उपद्रवी ही निशाने पर होना चाहिए। गोले हवा की दिशा देखकर 45 से 60 डिग्री पर छोड़े जाते हैं। परिस्थितियों के अनुसार रबर बुलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि कोई पुलिसकर्मी घिर गया या भीड़ ने घेरकर हमला कर दिया तो ऐसी स्थिति में विवेक से निर्णय लेना चाहिए। इसमें जन, धन की हानि न हो।

एयर गन से आंसू गैस छोड़ते हुए पुलिसकर्मी।
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