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संचालन करना हुआ कठिन : 20 से कम छात्र संख्या वाले ब्लॉक के 66 स्कूल हो सकते हैं बंद

एक वर्ष पहले
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ब्लॉक में प्राथमिक स्कूलों में छात्र संख्या 20 या उससे भी कम है तो ऐसे स्कूलों की सूची राज्य शिक्षा केंद्र ने मंगाई थी। शिक्षा विभाग ने इस पर बड़वाह ब्लाॅक के 66 स्कूलों की जानकारी शासन को भेजी है। नए सत्र से पहले राज्य शिक्षा केंद्र आवश्यक बदलाव का निर्णय ले सकता है। एक बार फिर कई शासकीय स्कूलों में ताले लग जाएंगे। इसका कारण इन स्कूलों में छात्र संख्या बहुत कम हो गई है। इससे स्कूलों का संचालन करना कठिन हो गया है।

ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 397 है। इसमें से करीब 66 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या 20 से भी कम है। वहां शिक्षक स्टाफ होने के बाद भी यह स्थिति है। रिपोर्ट में विभाग ने शासन को अवगत कराया कि अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों की ओर परिजनों का रुझान अधिक होने से यह स्थिति बन रही है। ब्लाॅक के कई स्कूलों में शिक्षक स्टाफ की भी कमी है। ऐसे में विभाग छात्रों को पास के अन्य स्कूलों में भेजने के साथ शिक्षकों को शिक्षक विहीन या कम शिक्षक वाले स्कूलों में भेजकर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देने का विचार कर रहा है।

कई स्कूलों में शिक्षक स्टाफ की भी कमी, ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 397

25 स्कूलों में 10 से भी कम विद्यार्थी

ब्लाॅक की प्राथमिक स्कूलों में 25 स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 10 से भी कम रह गई है। हाईस्कूल जेठवाय की ईजीएस तेजाजी नगर में मात्र 3 विद्यार्थी, प्राथमिक विद्यालय बांगरदा बेरफड में 6, प्रावि क्रमांक 1 जूजाखेड़ी 10, प्रावि बालक बोधगांव 8, सेटेलाइट लोहारिया फालिया 2, ईजीएस बिडी फालिया 10, सेटेलाइट भोकरनाला 7, ईजीएस मोरीपूरा 4, प्रावि बिलाली 0, प्रावि बालक सुरपाला 10, प्रावि कपास्थल 8, प्रावि सुल्तानपूरा 8, प्रावि रामगढ़ 6, प्रावि भोगावा सिपानी 10, ईजीएस पटेल फलिया चांदपूरा 9, प्रावि बरगना 10, सेटेलाइन नवादा फलिया 3, ईजीएस ब्राह्मणपूरी बरझर 6, ईजीएस सरपंच फलिया 0, ईजीएस चौकीदार फलिया 0, प्रावि देलवाड़ा 7, प्रावि रायझर 4, प्रावि खमलाय 7, प्रावि राजपूरा में 6 विद्यार्थी स्कूल में शामिल हैं। इन स्कूलों को बंद करने के लिए जिला शिक्षा केंद्र ने राज्य शिक्षा केंद्र को प्रस्ताव भेजा है।

शहर में स्थित बीआरसी कार्यालय।

बीआरसी पंवार बोेले- छात्र संख्या कम होने से चिन्हित किए स्कूल

बीआरसी डीएस पंवार ने बताया विभाग समय-समय पर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रायमरी से लेकर हायर सेकंडरी स्तर तक की जानकारी मांगता है। कई स्कूलों में छात्र संख्या 20 से कम है। उनकी जानकारी भेजी जा चुकी है। 1 अप्रैल से नया सत्र शुरू होना है। इससे पहले या जुलाई से पहले विभाग कोई निर्देश जारी करेगा। उस मान से आवश्यक प्रबंध किया जाएगा।

स्कूल बंद करने पर पास के स्कूलों में करेंगे विद्यार्थियों के नाम दर्ज

स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा तो उनके बच्चों को पास के स्कूलों में दर्ज किया जाएगा। हालांकि यह बात खास है कि जिन भी स्कूलों के नाम इस सूची में शामिल हैं जो बंद हो रहे हैं। उनके बच्चों को पास में पढ़ने के लिए दूसरे शासकीय स्कूल उपलब्ध हैं। इनकी दूरी एक से दो किमी के बीच ही है। कई जगह तो पास में ही दूसरे स्कूल हैं। इसके लिए बच्चों को अधिक परेशानी नहीं होगी।

बड़ा कारण : बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाना चाहते हैं परिजन

सरकारी स्कूलों के बजाय परिजन बच्चों को निजी व अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। कई निजी स्कूलों में तुलनात्मक बेहतर शिक्षक स्टाफ, पढ़ाई का तरीका, कोर्स, खेलकूद गतिविधि जैसे कई बिंदुओं पर अधिक ध्यान दिया जाता है। स्पर्धा के जमाने में परिजन की यही सोच है। कुछ सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या कम होने का बड़ा कारण भी सामने आया है। स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने का दूसरा कारण शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत हर साल निजी स्कूलों को कक्षा एक में 25 फीसदी बच्चे शास. स्कूलों के लेना अनिवार्य है। इस कारण सरकारी स्कूलों में बच्चे कम हो रहे हैं। समय पर स्कूल नहीं खुलने की शिकायतों के अलावा शिक्षकों के होने के बाद भी पढ़ाई नहीं कराने की समस्या शासकीय स्कूलों में होती है। इस तरह के आरोप कभी पालक तो कभी निरीक्षण के दौरान सामने आते हैं। दो साल पहले भी बड़ी संख्या में शासकीय स्कूल बंद कर दिए गए थे। उस समय भी यही स्थिति बनी थी। जहां बच्चे ही नहीं थे।
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