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हादसे और बीमारी में मृत अध्यापकों की पत्नी मजदूरी-सिलाई से चला रहीं परिवार

2 वर्ष पहले
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प्रदेश में हादसे व बीमारी से मृत अध्यापक संवर्ग के परिवार जीवन से जूझ रहे हैं। उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिल रही है न पेंशन। मुखिया की मृत्यु के बाद उनकी प|ियां मजदूरी व सिलाई करके आजीविका चलाने को मजबूर हो रही हैं। वजह शिक्षा के अधिकार अधिनियम में निराश्रितों के लिए डीएड, बीएड व शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की पात्रता लगा दी है। अध्यापकों के परिवार गुमनामी की जिंदगी बसर कर रहे हैं। परिजन की आवाज को सरकार के प्रतिनिधि व शिक्षा विभाग अफसर सुनकर कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं।

मामले अध्यापक प्रतिनिधियों तक लगातार आ रहे हैं। वेतन बंद होने से महिलाओं को बच्चों की पढ़ाई व गृहस्थी संभालना पड़ रही है। प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने बताया 4500 से ज्यादा मामले हैं। होशंगाबाद सांसद उदय प्रतापसिंह के नेतृत्व में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री संजय शामराव धौत्रे काे दिल्ली में मिलकर बात रखी है। उनसे अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में डीएड व बीएड व शिक्षक पात्रता की अनिवार्यता संबंधी संशोधन व पेंशन योजना लागू करने की मांग रखी। मंत्री ने अनुकंपा के मामले में विधेयक पारित कराएंगे। राज्य सरकारों को भी शिथिलीकरण कराने की कार्रवाई को कहा है।

शोक में डूबे आश्रितों का जारी है नियम बदलने तक संघर्ष

सिलाई कर चला रही घर, खलिहान बेच बच्चों को पढ़ाया

उमावि दौड़वा के वरिष्ठ अध्यापक मोहन फत्तू कन्नौजे की सड़क हादसे में 6 मार्च 2015 को मृत्यु हो गई। प|ी वंदना सिलाई करके घर चला रही हैं। वे बताती है बीए व डीएड किया है। घर मुश्किल से चल रहा है। बच्चों की पढ़ाई में पैतृक खलिहान बेचना पड़ा है। शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं दी। ये पास होते तो अनुकंपा नियुक्ति की जरूरत ही क्या थी।

खरगोन में 64 पीड़ित परिवार, विभागीय स्तर पर हो परीक्षा

राज्य शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष प्रभुराम मालवीया ने बताया आकस्मिक मृत्यु पर अनुकंपा नियुक्ति के खरगोन जिले में भी 64 से ज्यादा मामले अटके हैं। परिजन को अपने खर्च पर बीएड या डीएड करने व शिक्षक पात्रता परीक्षा पास होना मांग रहे हैं। परिजन को विभागीय तौर पर परीक्षा दिलाकर संबल देने की जरूरत है।

मजबूरी नहीं मजदूरी, स्थायी जरुरत है

पूनम सुखलाल बड़ोले प्रावि धूलकोट में वर्ग-3 में थे। 15 सितंबर को हादसे में नहीं वे नहीं रहे। बड़ोले की प|ी कविता 12वीं पास है, उन्हें अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई। वे मजदूरी कर बेटी हर्षिता व कुणाल को पढ़ाने के साथ गृहस्थी चला रही हैं।

8 साल में पात्रता परीक्षा, कुछ नहीं कर पाई सरकार

झिरन्या प्रावि के गोमलफाल्या में जयप्रकाश जायसवाल वर्ष 1998 से अध्यापक वर्ग-3 में पदस्थ थे। 2 जनवरी 2019 को सड़क हादसे में नहीं रहे। प|ी नूतन बताती हैं हादसे के बाद दो बच्चों सहित पापा पर आश्रित हूं। विभागों से लेकर प्रभारी मंत्री तक आवेदन देकर मांग की। सरकार कुछ नहीं कर पाई। बीए पढ़ी हूं। 8 साल बाद सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा ली।

बीएड-डीएड पास नहीं की तो नियुक्ति से वंचित

झिरन्या के रोशिया जागीर में सहायक अध्यापक अनिल अधिकार का दिसंबर 2018 में हृदयाघात से निधन हो गया। प|ी अभिलाषा का कहना है बीएड व पात्रता परीक्षा पास नहीं है इसलिए अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली। बेटा प्रायवेट नौकरी कर रहा है।

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