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प्रकृति के शहंशाह : कुएं से 1500 लीटर पानी लाकर सींचते हैं 625 पौधे

भरी गर्मी में पौधों को कैसे जिंदा रखा जाए इसका पाठ सीखना है, तो खातेगांव तहसील के ग्राम अमेली के शफी नजू शाह (51) से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:50 AM IST

प्रकृति के शहंशाह : कुएं से 1500 लीटर पानी लाकर सींचते हैं 625 पौधे
भरी गर्मी में पौधों को कैसे जिंदा रखा जाए इसका पाठ सीखना है, तो खातेगांव तहसील के ग्राम अमेली के शफी नजू शाह (51) से सीखा जा सकता है। शफी पेशे से फकीर हैं। सुबह-सुबह गांव में झोली लेकर फेरी पर निकलते हैं, जो मिलता है खुशी से अपने घर ले अाते हैं। उसके बाद उनकी दिनचर्या का दूसरा हिस्सा शुरू होता है, वो है पौधों को पानी देने का। अमेली से 3 किमी दूर पठार नुमा जमीन पर एक देवस्थान है जिसे बगवई बोला जाता है, उसी के पास लगभग 3.5 एकड़ पथरीली सरकारी जमीन है। हालांकि इस जमीन पर शफी के परिजन का पिछले 40 साल से कब्जा है, लेकिन अभी तक उसे पट्टा नहीं मिला। 2 जुलाई 17 को जब पूरे मध्यप्रदेश में 6 करोड़ पौधे रोपे गए उसी दिन यहां भी आम, जाम, नींबू, संतरा जैसी प्रजातियों के 625 पौधे रोपे गए। शफी को पौधरक्षक के रूप में इन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई।

 

पौधों को एक दिन में तीन बार देते हैं पानी

गांव के बाहर स्थित एक कुएं से अपने हाथों से पानी खींचते हैं और 500 लीटर पानी की टंकी बैलगाड़ी पर रखकर 3 किमी दूर पौधरोपण स्थल तक लेकर जाते हैं। वहां जाकर छोटे ड्रम या पाइप के सहारे पौधों में पानी देते हैं। ऐसा शफी एक दिन में 3 बार करते हैं। प|ी बसकर बी भी उनका इसमें सहयोग करती है। दोनों मिलकर अपने बच्चों की तरह पौधों के देखभाल करते हैं। समय-समय पर निंदाई भी करते हैं।

कम पानी से सिंचाई के लिए लगाया जुगाड़ का ड्रिप सिस्टम : कम पानी मे सिंचाई हो सके इसलिए शफी ने कुछ पौधों में जुगाड़ का ड्रिप सिस्टम भी लगा रखा है। अटाले/कबाड़ में पड़ी हुई पानी की बोतलें या प्लास्टिक की छोटी केन उठा लेते हैं। पौधे के बाजू में एक डंडा गाड़ उस पर उल्टा बांध देते हैं। सलाइन चढ़ाने वाले पतले पाइप की मदद से पानी की सप्लाई को कंट्रोल करते हैं ताकि जमीन में ज्यादा देर तक नमी बनी रहे।

100 प्रतिशत पौधे जीवित

2 जुलाई को मध्यप्रदेश में 6 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाने का दावा किया गया था। लेकिन कई जगहों पर जीवित पौधों की संख्या 10-20 प्रतिशत ही बची है। शफी ने योजनांतर्गत लगाए पूरे 625 पौधों को अपने दम पर जीवित रखा है।

पौधों की सुरक्षा के लिए मेटी/ग्रीन नेट लगाई

शफी ने बताया कि मेरे हालात तंग हैं, इसलिए दवाई/कीटनाशक का खर्च नहीं उठा सकता। पौधों को सिर्फ पानी देकर जिंदा रखा है। उनके परिवार में प|ी बसकरबी के अलावा एक बेटा है जो मजदूरी करता है और दो लड़कियां शादी करने योग्य हैं।

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