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आपसी मतभेद का अंत करता है अध्यात्मज्ञान

आज संसार मे अशांति बढ़ती जा रही है। हर आदमी कहता है कि मेरा मन चंचल है। इस चंचल मन को स्थिर करने के लिए हमें क्या करना...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:55 AM IST
आज संसार मे अशांति बढ़ती जा रही है। हर आदमी कहता है कि मेरा मन चंचल है। इस चंचल मन को स्थिर करने के लिए हमें क्या करना होगा। सबसे पहले हमें वह स्थिर बिंदू जो अपरिवर्तित सत्य जो बदलता नहीं है उसे जानना होगा। मन स्थिर होगा। जो चीज स्वयं परिवर्तनशील है, जो स्वयं चंचल है। गतिशील है उसमें मन लगाने से हमारा मन कभी स्थिर नहीं हो सकता है।

यह विचार रिजगांव मे आयोजित दो दिवसीय सत्संग समारोह में सतपाल महाराज की शिष्या मेत्रईबाईजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा यह स्थिर तत्व संतों की, सद्गुरु की शरणागत होने पर प्राप्त होता है। साध्वी दीप्तीबाईजी ने कहा यह संसार नश्वर है। यहां से कोई भी वस्तु हमारे साथ जाने वाली नहीं है लेकिन जिस दिन इस शरीर से सांस निकल जाएगी तो सारी चीजें यहीं धरी रह जाएगी। साध्वी महाश्वेताबाई ने प्रवचन दिए।

खातेगांव। प्रवचन के पूर्व साध्वियों का स्वागत करते हुए श्रद‌्धालु।