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ये हैं रियल लाइफ के फुंसुक वांगडू, ड्रोन के पार्ट खरीदने के नहीं थे पैसे तो खुद बना ली मशीन

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2018, 04:19 AM IST

शहर के 21 साल के स्टूडेंट विकास ने अनूठा काम करके दिखाया। उन्होंने ड्रोन के पार्ट्स बनाने वाली मशीन खुद तैयार कर ली।

विकास बीई इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन के लास्ट ईयर के स्टूडेंट हैं। विकास बीई इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन के लास्ट ईयर के स्टूडेंट हैं।
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सागर (भोपाल). शहर के 21 साल के स्टूडेंट विकास ने अनूठा काम करके दिखाया। उन्होंने ड्रोन के पार्ट्स बनाने वाली मशीन खुद तैयार कर ली। उन्होंने एक ऐसी मशीन तैयार की है जो कई तरह की मशीन के पार्ट्स तैयार कर सकती है। दरअसल, विकास ने एक ड्रोन बनाया था। लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से वो ज्यादा दिन चल नहीं सका और खराब हो गया। विकास के पास ड्रोन को ठीक कराने के लिए रुपए नहीं थे जिस वजह से उसने इस मशीन को घर पर ही बना लिया। उनकी मशीन कई तरह के पार्ट्स तैयार कर सकती है। अब चाहे ड्रोन की आर्म हो, प्रिंटर्स के गियर, पुली, मोबाइल केसिंग हो या फिर गिफ्ट आइटम। जिद से हासिल की राह...

- विकास ने यह सब अपनी जिद और लगन से करके दिखाया है। बीई इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन के लास्ट ईयर के स्टूडेंट हैं। विकास के मुताबिक उन्हें कक्षा-7वीं से ही मशीनों में इंटरेस्ट था।

- ड्रोन के लिए जब पार्ट खरीदने गया तो पता लगा कि छोटे-छोटे से कलपुर्जे बहुत महंगे आते हैं। तय किया कि यह जरूरी सामग्री खुद बनाकर इन्हें सस्ते दामों में सबको उपलब्ध कराऊंगा।

3 हजार में लेपटॉप लिया और सुधारकर गॉड मशीन से जोड़ लिया

- 3 हजार रुपए में पुराना लेपटॉप लिया और खुद सुधारा। एक मशीन बनाकर नाम दिया गॉड मशीन।

- लैपटॉप में पुर्जे की डिजाइन बनाने के बाद मशीन से आउटपुट मिल जाता है। नए इक्यूपमेंट, पार्ट्स के बारे में गूगल से समझकर हूबहू वैसा ही प्लास्टिक से बना लेते हैं।

काम को पहचान भी मिली

- मई में तिरुपति में होने जा रही इंटरनेशनल यंग साइंटिस्ट कांग्रेस के लिए विकास का पेपर चुना गया है। इसके अलावा कई एग्जीबिशन में अवार्ड और सर्टिफिकेट्स भी उन्हें मिल चुके हैं।

विकास जब ड्रोन के लिए पार्ट खरीदने गया तो पता लगा कि छोटे-छोटे से कलपुर्जे बहुत महंगे आते हैं। तय किया कि यह जरूरी सामग्री खुद बनाकर इन्हें सस्ते दामों में सबको उपलब्ध किया जाए। विकास जब ड्रोन के लिए पार्ट खरीदने गया तो पता लगा कि छोटे-छोटे से कलपुर्जे बहुत महंगे आते हैं। तय किया कि यह जरूरी सामग्री खुद बनाकर इन्हें सस्ते दामों में सबको उपलब्ध किया जाए।
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इस मशीन से कई तरह की मशीनों के पार्टस बनाए जा सकते हैं। इस मशीन से कई तरह की मशीनों के पार्टस बनाए जा सकते हैं।
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विकास बीई इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन के लास्ट ईयर के स्टूडेंट हैं।विकास बीई इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन के लास्ट ईयर के स्टूडेंट हैं।
विकास जब ड्रोन के लिए पार्ट खरीदने गया तो पता लगा कि छोटे-छोटे से कलपुर्जे बहुत महंगे आते हैं। तय किया कि यह जरूरी सामग्री खुद बनाकर इन्हें सस्ते दामों में सबको उपलब्ध किया जाए।विकास जब ड्रोन के लिए पार्ट खरीदने गया तो पता लगा कि छोटे-छोटे से कलपुर्जे बहुत महंगे आते हैं। तय किया कि यह जरूरी सामग्री खुद बनाकर इन्हें सस्ते दामों में सबको उपलब्ध किया जाए।
इस मशीन से कई तरह की मशीनों के पार्टस बनाए जा सकते हैं।इस मशीन से कई तरह की मशीनों के पार्टस बनाए जा सकते हैं।
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