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ये कैसा नेत्र विभाग; डॉक्टर नहीं यहां सिर्फ चश्मे के नंबर मिलते हैं

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 07:42 AM IST

आंख का परीक्षण करके उनको सेवा सदन रेफर कर दिया जाता है।

What is this eye department?

कोलार (भोपाल). कोलार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात दिनोंदिन बदतर होते जा रहे हैं। यहां के नेत्र विभाग को खुले 16 महीने बीत चुके हैं पर अब भी आंखों के डॉक्टर नहीं मिले। यह विभाग पिछले डेढ़ साल से ऑप्टोमेट्रिस्ट के भरोसे चल रहा है। जबकि डॉक्टर की पदस्थापना के लिए सिर्फ प्रयास ही किए जा रहे हैं। यहां आंखों की जांच करवाने के लिए रोजाना दो दर्जन से अधिक मरीज आते हैं। जिनकी आंख का परीक्षण करके उनको सेवा सदन रेफर कर दिया जाता है।

- यहां आने वाले मरीजों का कहना है कि यहां इलाज के नाम पर सिर्फ चश्मे के नंबर मिल जाते हैं। नेत्र विभाग के होने के बावजूद मरीजों को इलाज करवाने के लिए निजी अस्पताल या फिर जेपी अस्पताल ही जाना पड़ता है।

- उधर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टर की नियुक्ति के लिए मंजूरी का इंतजार है। हालांकि उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि बिना डॉक्टर के नेत्र विभाग कैसे शुरु कर दिया गया।

विभाग को संचालित कर रहीं 4 एजेंसियां
- हैरत की बात है कि केंद्र में नेत्र विभाग को चार एजेंसियां संचालित कर रही हैं। यहां साइट सेवर्स, सेवा सदन, आरंभ संस्था और राज्य सरकार द्वारा अमृता दृष्टि मध्यप्रदेश शहरी नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम का संचालन किया जाता है। यहां सप्ताह में चार दिन शिविर लगाया जाता है। बाकी दिन अस्पताल परिसर में ऑप्टोमेट्रिस्ट कर्मचारी सुबह 1 से शाम 5 बजे तक मरीजों की आंख का परीक्षण करते हैं।

डाॅक्टर के लिए मंजूरी का इंतजार
- कोलार की आबादी लगभग 3 लाख है। क्षेत्र की आबादी लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है। हालांकि समय-समय पर सामजिक संगठनों द्वारा स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं के विस्तार को लेकर मांग की गई।

- इस बीच नेताओं ने भी आकर कई घोषणाएं कीं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो रहा है। इस वजह से यहां आने वाले मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। क्षेत्र की जनता का आरोप है कि राजधानी का हिस्सा होने के बावजूद यहां ग्रामीण क्षेत्र जैसे हालात बने हुए हैं।

जांच करवाने के लिए रोजाना यहां पहुंचते हैं 25 से ज्यादा मरीज वार्ड-81
- अस्पताल के नेत्र विभाग में जल्द ही डॉक्टरों की नियुक्ति होगी। विभाग से मंजुरी मिलते ही डॉक्टर पदस्थ किये जाएंगे।

-सुधीर जैसानी, सीएमएचओ

जल्द ही डॉक्टर पदस्थ किए जाएंगे
- अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत है। डॉक्टर के नहीं होने की वजह से मरीजों को असुविधा हो रही है।

-महेशचंद्रभटनागर, रहवासी

विशेषज्ञ डॉक्टर की है जरूरत
- नेत्र विभाग में कार्यरत ऑप्टोमेट्रिस्ट राहुल लश्कार ने बताया कि यहां रोजाना 2 दर्जन से अधिक मरीज आंख के इलाज के लिए आते हैं। चूंकि यहां डाॅक्टर नहीं हैं इसलिए पर्चे पर दवाएं नहीं लिखते हैं। इधर मरीजों को चश्में का नंबर और आंख के लिए एंटीबायोटिक दवा भर लिखते हैं।

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