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मानव के चिंतन में सफलता नहीं सार्थकता होना चाहिए

पूरे भारत देश में प्रत्येक घर की महिलाओं को प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे अपने घर के प्रत्येक सदस्यों के साथ रामचरित...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 10, 2018, 03:25 AM IST

मानव के चिंतन में सफलता नहीं सार्थकता होना चाहिए
पूरे भारत देश में प्रत्येक घर की महिलाओं को प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे अपने घर के प्रत्येक सदस्यों के साथ रामचरित मानस का पाठ करना चाहिए। जिससे परिवार के बच्चों में उच्च संस्कारों के साथ धार्मिक विचारों का संचार होगा। आज के मानव को अपने जीवन मे ऊंच नीच का भेद मिटाकर सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार करना चाहिए तभी मानव जीवन की सार्थकता सिद्ध होगी। मानव के चिंतन में सफलता नहीं सार्थकता होना चाहिए। मन को टटोलना ओर उसका आंकलन करना बेहद जरूरी है।

यह बात नगर के सुतार मोहल्ले में संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति द्वारा आयोजित रात्रिकालीन संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव के नौवे दिन मंगलवार को पं. संजयकृष्ण त्रिवेदी कांटाफोड़ (देवास) ने श्रद्धालुओं से कही। कथा महोत्सव के अंतिम दिन समिति की ओर से जल, टेंट, लाइटिंग आदि व्यवस्थाओं के दानदाताओ का मंच से सम्मान किया गया। नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में यज्ञ की पूर्णाहुति एवं महाआरती के साथ श्रीरामकथा का समापन हुआ। कथा समापन के पश्चात महाप्रसादी का वितरण भी किया गया। महाआरती एवं महाप्रसादी के लाभार्थी अजय गेहलोत थे। श्रीराम कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यजमान बाबूलाल सोलंकी के साथ ही राजेश सेप्टा, संजय पंवार, कैलाश बर्फा, जयंतीलाल बर्फा, गणेश राठौर आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं, दानदाताओं आदि का आभार समिति की ओर से उपाध्यक्ष संजय पंवार ने माना।



संकट मोचन हनुमान मंदिर में रात्रिकालीन श्रीराम कथा महोत्सव के समापन पर पं. त्रिवेदी ने कहा

कुक्षी. कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

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