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जिस परिवार की नींव प्रेम है वहां परमात्मा अवतार लेते हंै : त्रिवेदी

कुक्षी | जिस परिवार की नींव पैसा है वहा परमात्मा नही आते है किंतु जिस परिवार की नींव प्रेम है वहा परमात्मा अवतार...

Dainik Bhaskar

May 05, 2018, 03:45 AM IST
जिस परिवार की नींव प्रेम है वहां परमात्मा अवतार लेते हंै : त्रिवेदी
कुक्षी | जिस परिवार की नींव पैसा है वहा परमात्मा नही आते है किंतु जिस परिवार की नींव प्रेम है वहा परमात्मा अवतार लेते है। यह मानव देह एक बड़ा ही दुर्लभ अवसर है मानव को हमेशा हरिनाम का संकीर्तन करना चाहिए।

मानव योनि को छोड़कर अन्य किसी भी योनि में भगवान का भजन करना संभव नहीं होता है इस कलिकाल में मानव देह से जाने अनजाने में भी बहुत से अकार्य हो जाते हैं जिनके प्रभाव से मनुष्य हमेशा दुखी रहता है और समस्त दुखों के निवारण के लिए ही भगवान ने कृपा करके हमें रामायण जैसा दिव्य ग्रंथ दिया है। उक्त विचार नगर के सुतार मोहल्ले में संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति द्वारा आयोजित रात्रि कालीन संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को पंडित श्री संजयकृष्ण त्रिवेदी ने श्रद्धालुओं से कहे। कथा में प्रवचन के दौरान उन्होंने आगे कहा कि काम,क्रोध और लोभ ये तीनो सगे भाई है। मानव को अपने जीवन मे इन तीनो पर विजय प्राप्त करना नही बल्कि उन्हें पूर्णतया भस्म करना चाहिए।आज हर मानव दुसरो के अवगुण देखने मे लगा हुआ है स्वयं के अवगुण मानव को नही दिखाई देते है स्वंय के अवगुणों को दूर करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है। कथा के दौरान “अवध में आनंद भयो जय रघुवर लाल की,पराया दर्द अपनाया उसे इंसान कहते है,अब सौप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथो में आदि संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु भक्तिभाव से झूम उठे। 30 अप्रेल से 8 मई रात्रि 8 से 11 बजे तक चलने वाले संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव में नगर सहित ग्रामीण अंचल से श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा सुनने पहुंच रहे हैं।

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