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भौतिक सुख-सुविधाएं होने के बाद भी मानव दु:खी है

भगवान शिव का दांपत्य जीवन सुखद है जिसका कारण है कि शिवजी अभाव में भी हमेशा प्रसन्न रहते हैं। आज के समय में भौतिक सुख...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 04:20 AM IST

भौतिक सुख-सुविधाएं होने के बाद भी मानव दु:खी है
भगवान शिव का दांपत्य जीवन सुखद है जिसका कारण है कि शिवजी अभाव में भी हमेशा प्रसन्न रहते हैं। आज के समय में भौतिक सुख सुविधाएं होने के बाद भी मानव दु:खी ही रहता है। भगवान शिव पर्वत पर रहकर भी आनंद का अनुभव करते है। भगवान शिव विश्वास एवं माता पार्वती श्रद्धा के प्रतीक है। अपने अंतकरण में रहते हुए भगवान के दर्शन के लिए इन दोनों (श्रद्धा-विश्वास) की ही आवश्यकता होती है। भगवान शिव स्वयं कथा सुनना पसंद करते है।

यह बात कुक्षी के सुतार मोहल्ले में संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति द्वारा आयोजित रात्रिकालीन श्रीराम कथा महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को पं. संजयकृष्ण त्रिवेदी कांटाफोड़ (देवास) ने श्रद्धालुओं से कही। आगे कहा श्रीराम कथा मानव के जीवन का पाप, ताप एवं संताप का हरण करती है। भगवान शिव के होठों पर हमेशा एकमात्र रामनाम ही रहता है और वही उनके जीवन में सुख का मूल है। कथा में मन ना लगाकर सती ने अपनी देह त्याग करके पार्वती के रूप में पुनः अवतार लिया था। कथा के दौरान आई शिवजी की बारात हिमाचल नगरी.., मेरा भोलानाथ ऐसा भक्तों का रखवाला है…जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। रामकथा महोत्सव में मंगलवार रात को शिव पार्वती विवाह भी सम्पन्न हुआ। जिसमें दो छोटी बालिकाओं ने मनमोहक श्रंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती के रूप में आकर्षक प्रस्तुतियां दी।

कथा के मुख्य यजमान बाबूलाल नैनाजी सोलंकी ने व्यासपीठ का पूजन किया। महाआरती एवं महाप्रसादी के लाभार्थी मनोज राठौड़ थे। कथा सुनने नगर सहित ग्रामीण अंचल से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे है। गौरतलब है कि कथा 30 अप्रैल से 8 मई तक रात 8 से 11 बजे तक चलेगी।

आयोजन



सुतार मोहल्ले में आयोजित रात्रिकालीन श्रीराम कथा महोत्सव के दूसरे दिन बोले पं. त्रिवेदी

कुक्षी. सुतार मोहल्ले में चल रही कथा को सुनने श्रद्धालु पहुंच रहे।

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