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मानव जब तक अभिमान करेगा तब तक उसे शांति नहीं मिलेगी: त्रिवेदी

शिव धनुष अलंकार का प्रतीक है मानव अपने दुर्गुणों पर विजय तो प्राप्त कर लेता है किंतु उसका अभिमान पचा नहीं पाता है...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 06, 2018, 07:10 AM IST

मानव जब तक अभिमान करेगा तब तक उसे शांति नहीं मिलेगी: त्रिवेदी
शिव धनुष अलंकार का प्रतीक है मानव अपने दुर्गुणों पर विजय तो प्राप्त कर लेता है किंतु उसका अभिमान पचा नहीं पाता है और जब तक वह इसका अभिमान करेगा तब तक उसे शांति प्राप्त नहीं होगी। परशुरामजी ने समाज के दुर्जन अहंकारी राजाओं को दंड दिया था किंतु इसका अभिमान भी उनके अंदर मौजूद था वहीं भगवान श्रीराम ने अपने मृदु एवं गूढ़ वचनों से परशुरामजी का अहंकार समाप्त किया था।

श्रीरामचरितमानस मानव के भीतर बैठे रावण को मारने के लिए एक सुंदर आध्यात्मिक साधन है श्रीरामचरितमानस के दोहे,मंत्र एवं चौपाइयां मानव जीवन पर बहुत असर डालती है। परशुरामजी ब्राह्मण थे और वे क्षत्रिय का काम कर रहे थे किंतु भगवान श्रीराम को देखकर उन्होंने अपने शस्त्र श्रीराम को सौंपकर तप करने हेतु वन की यात्रा पर निकले थे। उक्त वचन नगर के सुतार मोहल्ले में संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति द्वारा आयोजित रात्रि कालीन संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव के पांचवे दिन शुक्रवार को पंडित श्री संजयकृष्ण त्रिवेदी ने श्रद्धालुओं से कहे। रामकथा महोत्सव में भगवान श्रीराम विवाह बड़ी धूमधाम से मनाया गया। व्यासपीठ का पूजन मुख्य यजमान के साथ ही समिति अध्यक्ष राजेश सेप्टा,उपाध्यक्ष संजय पंवार, कोषाध्यक्ष कैलाश बर्फा, जयंतीलाल बर्फा, गणेश राठौर आदि ने किया। शुक्रवार की महाआरती एवं महाप्रसादी के लाभार्थी राजेन्द्र चौकसी रहे।

कुक्षी में प्रवचन देते त्रिवेदी।

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