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समाज : मुनि तरुणसागरजी समग्र समाज के मार्ग दर्शक थे- साध्वी अविचल दृष्टाजी

कुक्षी | संत किसी एक धर्म या समाज की जागीर नहीं होती है वे तो समग्र मानव समाज के प्रतिनिधि होते है और मुनि...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 03:00 AM IST
कुक्षी | संत किसी एक धर्म या समाज की जागीर नहीं होती है वे तो समग्र मानव समाज के प्रतिनिधि होते है और मुनि तरुणसागरजी मानवता का प्रतिनिधित्व करते थे। मात्र 13 वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण करना और 51 वर्ष की कम उम्र में संसार से विदा होने से पहले पूरे विश्व में अपने प्रवचनों के माध्यम से जन-जन के दिलों में बसना बिरले संतों को ही नसीब होता है। यह बात मुनि की विनयांजलि सभा को संबोधित करते हुए कुक्षी में चातुर्मास के लिए विराजित साध्वी अविचल दृष्टाश्रीजी ने कही। प्रारंभ में मुनि के चित्र पर सिर्वी समाज, ब्रजवासी समाज, कसेरा समाज, सोनी समाज, पाटीदार समाज प्रमुखों ने दीप प्रज्वलित किया। विनयांजलि कार्यक्रम में सभी समाजों के नागरिकों ने विस्तृत से मुनि के जीवन पर प्रकाश डाला।