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बेटी बचाओ सफल होगा, जब बेटा संस्कारी हो

सरिता पांडे ग्लोबल फाउंडेशन दिल्ली की संस्कारी बेटा अभियान के तहत प्रथम चरण पर निकली चेतना यात्रा शनिवार को यहां...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 03:00 AM IST

बेटी बचाओ सफल होगा, जब बेटा संस्कारी हो
सरिता पांडे ग्लोबल फाउंडेशन दिल्ली की संस्कारी बेटा अभियान के तहत प्रथम चरण पर निकली चेतना यात्रा शनिवार को यहां पहुंची। संस्था संचालक सरिता पांडे ने कहा बेटियां संस्कारित हुई तो परिवार संभलेंगे व बेटे संस्कारित हुए तो दुनिया संभलेगी। समाज व सरकार ने बेटियों को संस्कारी बनाया है, लेकिन बेटों की तरफ भी ध्यान देना जरूरी है। बेटी बचाओ अभियान तभी सफल हो पाएगा जब बेटे संस्कारी होंगे। आज के अपराध जगत से सभी का सामना हो रहा है।

लड़कों में ऊर्जा बहुत है। उस सकारात्मक ऊर्जा को संस्कारित बनाना है तभी वह समाज रक्षक बनेगा। 21वीं सदी में विकास के तमाम दावों के बावजूद तेजी से हमारे समाज का नैतिक पतन हो रहा है। नई पीढ़ी कई चुनौतियों से जूझ रही है। कड़े कानूनों के बाद भी भ्रष्टाचार, हत्या व बलात्कार हो रहे हैं। महिलाओं व कमजोर वर्ग ही नहीं पुरुषों के प्रति भी अपराध बढ़ते जा रहे हैं। जीवन का लक्ष्य अच्छा इंसान बनना नहीं बस प्रोफेशनल बन जाना रह गया है। पैसा कमाने की होड़ मची है। यह समाज के नैतिक पतन का मूल कारण है। बेटों की असीम ऊर्जा व संभावनाओं को बचपन से ही सत्चरित्र सेवा जैसे मूल्य ना सिखाना और संस्कारित ना कर सही दिशा ना देना समाज की बड़ी भूल है। उन्होंने कहा दिल्ली में दो साल से अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही आरंभ संस्कार ज्ञानशाला में गरीब बच्चों को निशुल्क रूप से शिक्षा व भोजन का प्रबंध भी करते है। यात्रा टीम प्रमुख मधुकर पांडे ने कहा अगर हम अपने परिवार व खासतौर पर बेटों को भी संस्कारी बना लेंगे तो वह खुद एक उदाहरण बनेंगे। समाज में होने वाले अत्याचारों के खिलाफ खड़े होंगे। उनकी सकारात्मक ऊर्जा व अपार शक्तियांे का उचित उपयोग होगा।

पहल

संस्कारी बेटा अभियान के तहत चेतना यात्रा पहुंची, सरिता पांडे ग्लोबल फाउंडेशन सदस्य बोले-

चेतना यात्रा को लेकर फाउंडेशन संचालक सरिता पांडे ने जानकारी दी।

नर्मदा को स्वच्छ रखने के लिए करेंगे नर्मदा परिक्रमा

बलवाड़ा | 3 हजार 300 किमी की पैदल नर्मदा परिक्रमा पर सेल्दा-बलवाड़ा का परिवार रविवार सुबह रवाना होंगे। यात्रा ओंकारेश्वर से प्रारंभ होकर भरूच काटपुट से समुंदर पार करके उत्तर तक होते हुए अमरकंटक पहुंचेगी। वहां से वापस ओंकारेश्वर में आकर समाप्त होगी। यात्रा में सेल्दा के तुलसी राम मोटा, प|ी कमलाबाई, गोकुल प|ी बसुबाई ग्राम जूना बलवाड़ा व उनकी बहन मीरा रामगढ़ परिक्रमा पर जा रहे हैं। तुलसीराम मोटा ने बताया क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि के लिए परिक्रमा की जा रही है। नर्मदा व नदियों को स्वच्छ रखने ही मुख्य उद्देश्य है।

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