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पिछली किताब 21 देशों में पढ़ी गई, अब तुलसाबाई पर लिख रहीं

क्षेत्र की वीरांगना तुलसाबाई के जीवन पर पुने (महाराष्ट्र) निवासी मराठी लेखिका निलाबंरी गानू द्वारा पुस्तक लिखी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 04:35 AM IST

पिछली किताब 21 देशों में पढ़ी गई, अब तुलसाबाई पर लिख रहीं
क्षेत्र की वीरांगना तुलसाबाई के जीवन पर पुने (महाराष्ट्र) निवासी मराठी लेखिका निलाबंरी गानू द्वारा पुस्तक लिखी जा रही है। जो तुलसाबाई के चरित्र से इतनी प्रभावित हुई कि उनके कार्यक्षेत्र व समाधि स्थल देखने खिंची चली आई। गुरुवार को डाॅ. अश्विनी शोध संस्थान के अध्यक्ष डाॅ. आरसी ठाकुर, डाॅ. सुधा ठाकुर के साथ गऊ घाट स्थित तुलसाबाई की समाधि पर पहुंची। जहां पर डाॅ. ठाकुर से जानकारी लेने के साथ ही तुलसाबाई की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। पुस्तक लेखन के साथ तुलसाबाई का आकर्षक चित्र भी बनाया है। वर्तमान में लेखिका निलाबंरी के घुटनों की काफी तकलीफ है। उसके बावजूद तुलसाबाई की स्थली देखने की चाह में अपनी तकलीफ भूल गई। तुलसाबाई की समाधि के साथ ही अन्य ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण भी किया। उल्लेखनीय है कि अंग्रेज मराठा युद्ध में 20 दिसंबर 1817 को 30 वर्षीय महारानी तुलसाबाई अपने ही सेनापतियों के विश्वासघात का शिकार हो गई थी।

तुलसा बाई की समाधि पर श्रद्धांजलि देती लेखिका निलाबंरी, डाॅ. ठाकुर। दूसरे चित्र में लेखिका द्वारा बनाया गया तुलसाबाई का काल्पनिक चित्र।

अहिल्याबाई से प्रभावित है लेखिका

लेखिका निलाबंरी होल्कर परिवार में सबसे ज्यादा अहिल्याबाई से प्रभावित है। अभी तक 5 पुस्तकें होल्कर राजवंश पर मराठी भाषा में लिख चुकी है। जिनमें शिवयोगनी, गंगाजल निर्मल, अहिल्याबाई बखर, अहिल्या देवी(हिंदी) व वर्तमान में यशवंत राव व तुलसाबाई पर किताब अंतिम चरण में है। इनमें से शिवयोगनी पुस्तक के लिए विश्व इतिहास परिषद द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। साथ ही यह पुस्तक 21 देशों में पढ़ी गई। जिनमें इंगलैंड के संग्रहालय में भी विशेष रूप से रखी गई है। शिवयोगनी में अहिल्याबाई के जन्म से अंत तक का पूर्ण परिचय समाहित है। सबसे खास बात यह भी है कि लेखिका होल्करों पर इतनी पुस्तक लिखने के बाद भी एक बार भी इंदौर या उससे संबंधित क्षेत्र में नहीं आई है। गुरूवार को भी पहली दफा नगर में आई है। लेखन के साथ ही निलाबंरी को नाटक, कविता, गीत व चित्रकारी का भी शौक है। कविता की रचनाएं युवा, वृद्ध सभी को प्रभावित करती है।

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