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महावीर स्वामी के शाला गमन के प्रसंग को किया जीवंत

पर्युषण के अंतर्गत श्रीकल्प सूत्र वाचन के दौरान प्रभु महावीर स्वामी के शाला गमन के मंगलमय प्रसंग को समाजजनों ने...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:15 AM IST
पर्युषण के अंतर्गत श्रीकल्प सूत्र वाचन के दौरान प्रभु महावीर स्वामी के शाला गमन के मंगलमय प्रसंग को समाजजनों ने मंगलवार को जीवंत कर दिया। इसके तहत श्री तपागच्छ श्रीसंघ में विमलचंद्र शिरोमणि मेहता परिवार द्वारा चल समारोह शांतिनाथ आराधना भवन से निकाला गया। समारोह बैंड-बाजे एवं ढोलक की थाप पर नाचते युवा प्रभु महावीर के जयकार लगा रहे थे। चल समारोह मुखिया पब्लिक स्कूल पहुंचा, जहां विद्यालय के बच्चों को कॉपी-पेन आदि का वितरण विमलचंद्र शिरोमणि मेहता परिवार ने किया। साथ ही श्रीसंघ की पूजन का लाभ भी लिया गया। इस अवसर पर धर्मसभा को श्रीसंघ में तपोवन अहमदाबाद से आए प्रवचनकार सुश्रावक उर्विल भाई ने बच्चों को आशीर्वचन दिए। इसी प्रकार सरस्वती शिशु मंदिर में भी बच्चों को भेंट दी गई। सोमवार को भी भूपेंद्र कुमार अर्पित कुमार मंडलेचा परिवार की ओर से नगर में मिठाई वितरण किया गया था। संचालन जैनेंद्र खेमसरा ने किया। अतिथि के रूप में तपागच्छ श्रीसंघ अध्यक्ष रमेशचंद्र कोचर, अजय मूणत, राजेश रूणवाल, महेश रुणवाल, विजय धाड़ीवाल, गिरधारीलाल उथरा, कमलचंद्र मेहता, अमित मेहता आदि मौजूद थे। आभार विश्वास, स्वतंत्र मेहता ने माना।

वर्ष भर में कर्मों का मैल धोने के लिए आता है पर्युषण-साध्वीश्री

महिदपुर रोड | पर्युषण महापर्व के छठे दिन की शुरुआत महा मंगलकारी भक्तांबर महा स्त्रोत एवं स्नात्र पूजा महोत्सव के साथ हुई। साध्वी विदवद गुणा श्रीजी एवं रश्मि प्रभा श्रीजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा धर्म व्यक्ति को जीवन में तैरा देता है एवं अधर्म व्यक्ति को डुबा देता है। पर्युषण महापर्व वर्ष भर में कर्मों का मैल धोने के लिए आता है। अंगीरचना भक्तांबर प्रवचन प्रभावना का लाभ डॉ. अमृतलाल दीपक कुमार आंचलिया, डॉ. दिनेश कुमार यादव परिवार खारवाकलां ने लिया। सोमवार की अंगी रचना भक्तांबर प्रभावना का लाभ अशोक कुमार, बापूलाल कोचर एवं संदीप कुमार, वर्षील कुमार डूंगरवाल परिवार ने लाभ लिया।

शांतिनाथ आराधना भवन से निकले चल समारोह में शामिल समाजजन।

प्रतिकार की शक्ति होने पर भी सहन करने वाले प्रभु महावीर, प्रभु महावीर के साधना मार्ग पर जैनाचार्य ने प्रवचन में कहा

बड़नगर | जैनाचार्य र|सुंदरसूरीश्वरजी ने पर्युषण के छठे दिन प्रभु महावीर के साधना मार्ग पर दिए प्रवचन में कहा साधना, समाधि एवं समर्पण करने वालों का मोक्ष न भी हो, लेकिन सहन करने वालों का मोक्ष संभव है। प्रभु महावीर के पास प्रतिकार की शक्ति होने के बावजूद भी सहन करने की तैयारी थी। प्रभु महावीर ने साढ़े बारह वर्ष तक अनेक उपसर्ग को सहन कर विचरण किया। बहुत तपस्या करने के बाद भी सबसे ज्यादा उपसर्ग महावीर पर आए। प्रशंसा धर्मी की ही होती है तो कसौटी पर भी उसे ही लगना है। परमात्मा के सामने झुकने वाला सभी को प्यारा लगता है, जबकि सबके सामने झुकने वाला परमात्मा को प्यारा लगता है। प्रभु का जन्म से लेकर दीक्षा तक का समय पुण्य का, दीक्षा से केवल ज्ञान प्राप्ति तक पीड़ा का काल एवं केवल ज्ञान के बाद निर्वाण तक परोपकार का समय रहा। भोजन, निद्रा एवं बोलचाल में जीवन का समय गंवाने की अपेक्षा समय बचाकर साधना मार्ग पर लगाएं।जो गुरु की कृपा को नहीं समझ सकता वह प्रभु की करुणा को भी नहीं समझ पाएगा।