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मलीय कीचड़ से बनाई जैविक खाद, किसानों काे बांट रहे फ्री

शहर से निकलने वाले सीवरेज को नगर परिषद प्लांटेड ड्राइंग बेड तकनीक में खपा रही है। इकाे फ्रेंडली तकनीक के जरिए मलीय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:55 AM IST

मलीय कीचड़ से बनाई जैविक खाद, किसानों काे बांट रहे फ्री
शहर से निकलने वाले सीवरेज को नगर परिषद प्लांटेड ड्राइंग बेड तकनीक में खपा रही है। इकाे फ्रेंडली तकनीक के जरिए मलीय कीचड़ उपचार कर जैविक खाद बनाकर किसानों काे नि:शुल्क बांटी जा रही है।

सीवरेज को ट्रेंचिंग ग्राउंड पर बिना ट्रीटमेंट के फेंका जा रहा था। गंदगी अाैर दुर्गंध से बीमारियाें का अंदेशा बना रहता था। नप ने किफायती तकनीक से शहर काे स्वच्छ बनाए रखने की अाेर कदम बढ़ाया। परिषद के अनूठे प्रयास काे संभागीय स्तर पर सराहा भी गया अाैर बड़े नगरीय तथा नगरपालिकाओं ने भी इस पर काम किया जा रहा है। इंजीनियर रवीश कादरी ने बताया शहर में सैफ्टी वेस्ट से गंदगी अाैर दुर्गंध से निजात दिलाने अाैर मलीय कीचड़ का उपचार कर जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्लांटेड ड्राइंग बेड तकनीक अपनाईं जा रही। इसमें मड पम्प में शहर के दाे सैफ्टी टैंकों से दस हजार लीटर वेस्ट इकट्ठा कर ट्रेंचिंग ग्राउंड पर चार फीट जमीन में गड्ढा कर कांक्रीट का बैस बनाकर इसमें मल अपशिष्ट से पानी निकासी के लिए एक आउटलेट पाइप देते है। गड्ढे काे सतह से ढार्इ फीट पर मिट्टी से भरा जाता अाैर वहां घास लगाकर इसमें मलीय कीचड़ डाला जाता।

नाइट्रोजन के कारण दुर्गंध फैलती पर घास नाइट्रोजन का उपयोग कर लेती अाैर फिर प्रकाश संश्लेषण क्रिया से एक-डेढ़ माह में मलीय कीचड़ जैविक खाद में तब्दील हा़े जाता है। दस हजार लीटर वेस्ट से दाे क्विंटल खाद बनता है। जाे खेतों में किसानों के लिए उपयोगी है। परिषद ने दाे पीट का निर्माण कराया है जिसमें जैविक खाद निर्माण का काम चल रहा है। यही तकनीक नगर परिषद कुकड़ेश्वर में भी अपनाईं गईं। दाेनाें जगह इसके अच्छे परिणाम मिले है अब परिषद ने गिले कचरे से भी जैविक खाद बनाने की शुरूआत की है।

ट्रेंचिंग ग्राउंड में नगर परिषद द्वारा इस तरह बनाई जा रही है जैविक खाद।

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