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चलती ट्रेन से भागने पर कुख्यात तस्कर बंशीलाल गुर्जर को 22 महीने की सजा

स्वयं को मृत घोषित करने वाले कुख्यात तस्कर बंशीलाल गुर्जर ने इंदौर पेशी से लौटते समय चलती ट्रेन से भागने के प्रयास...

Danik Bhaskar | Feb 01, 2018, 02:45 PM IST
स्वयं को मृत घोषित करने वाले कुख्यात तस्कर बंशीलाल गुर्जर ने इंदौर पेशी से लौटते समय चलती ट्रेन से भागने के प्रयास किया था। इस मामले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मनोज कुमार राठी ने आरोपी गुर्जर को 1 वर्ष 10 महीने की सजा सुनाई।

जिला लोक अभियोजन आरआर चौधरी ने बताया 22 मार्च 2006 को पुलिस जवान तस्कर गुर्जर को इंदौर हाईकोर्ट मे एनडीपीएस मामले में पेशी करवाकर ट्रेन से वापस लौट रहे थे। रात 11ः30 बजे मेनपुरिया के पास आरोपी ने टॉयलेट जाने का कहा। सुरक्षा में तैनात जवान उसे टॉयलेट ले गए। लेकिन दरवाजे के पास पहुंचते ही जवानों को धक्का देकर गुर्जर चलती ट्रेन से हथकड़ी छुड़ाकर कूद कर भाग गया। घटना की सूचना प्रधान आरक्षक दाताराम ने वरिष्ठ अधिकारियों को देते हुए जीआरपी नीमच में रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपी के नहीं पकड़े जाने पर फरारी में चालान न्यायालय में पेश किया। इसी दौरान 8 फरवरी 2009 में बेसलाघाट थाना रामपुरा में हुए एनकाउंटर में बंशीलाल पिता रामलाल गुर्जर (34) निवासी नलवा थाना कुकड़ेश्वर के मरने की खबर आई। आरोपी को मृत मानते हुए न्यायालय द्वारा प्रकरण में कार्रवाई समाप्त कर दी। आरोपी के जीवित होने का पता तब चला जब 22 फरवरी 2013 को कैंट पुलिस ने एक हत्या के मामले में इसे गिरफ्तार किया। के तत्कालीन आईबी सेल प्रभारी एसआई बसंत श्रीवास्तव ने आरोपी की 6 साक्षियों से पहचान करवाई गई। आरोपी को जीआरपी नीमच को सौंपा। शेष विवेचना पूर्ण कर पूरक चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन ने न्यायालय में सिद्ध किया की पकड़ा गया व्यक्ति बंशीलाल गुर्जर है। जिन पुलिस अधिकारियों के कब्जे से यह भागा था उनके साक्ष्य करवाई। आरोपी ने बचाव पक्ष में अपर सत्र न्यायालय मनासा के निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि प्रस्तुत की गई। इसमें उसका नाम बंशीलाल उर्फ शिवा उल्लेख किया था। इससे यह साबित गया कि बंशीलाल और शिवा एक ही व्यक्ति है। विद्वान न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए बंशीलाल गुर्जर को धारा 224 भादवि में उपरोक्त समाज से दंडित किया। शासन की ओर से सहायक जिला अभियोजन विवेक सोमानी ने पैरवी की।