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23 तीर्थंकरों के साथ कई लोगों ने दीक्षा ली थी, महावीर के साथ किसी ने नहीं ली

दीक्षा महोत्सव के समय वर्षीदान देने की परंपरा पहले तीर्थकर भगवान आदिनाथ के समय से चली आ रही है। भगवान महावीर...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 04:20 AM IST
Mandsour - 23 तीर्थंकरों के साथ कई लोगों ने दीक्षा ली थी, महावीर के साथ किसी ने नहीं ली
दीक्षा महोत्सव के समय वर्षीदान देने की परंपरा पहले तीर्थकर भगवान आदिनाथ के समय से चली आ रही है। भगवान महावीर स्वामी की दीक्षा के समय जो महोत्सव हुआ उसका कल्पसूत्र में बहुत ही सुंदर वर्णन है। प्रभुजी का दीक्षा से पहले वरघोड़ा निकाला जिसमें प्रभु ने दोनों हाथों से खूब दान दिया।

यह बात मुक्तिप्रिया मसा ने कहीं। वे रुपचांद आराधना भावन में चल रही धर्मसभा में बोल रही थी। वर्षीदान की परंपरा आज भी है लेकिन वर्षीदान में यदि चावल के साथ सिक्के रखकर दोनों हाथों से फेंकते है तो वर्षीदान की सामग्री इधर-उधर बिखर जाती है। इसलिए वर्षीदान दो तो पैक थैलियों में दो ताकि वह किसी के काम आए। साध्वी मृदुप्रिया मसा ने कहा कि सभी 23 तीर्थंकरों के साथ बड़ी संख्या में अन्य लोगों ने भी दिक्षाएं ली थीं, लेकिन महावीर स्वामी के साथ किसी ने भी दीक्षा नहीं ली। पंचम् आरे के प्रभाव के कारण बुरे में लोगों का साथ जल्द मिलता है, लेकिन अच्छे काम में लोगों का साथ नहीं मिलता। इसी कारण प्रभु ने अकेले ही संयम मार्ग चुन लिया।

साध्वी हर्षप्रिया ने कहा कि सभी तीर्थंकर के पांच कल्याण होते है चवर, जन्म, दिक्षा, केवलज्ञान व मोक्ष कल्याण। भगवान महावीर के पांच कल्याण माने गए चवर कल्याण अर्थात गर्भ में आने की स्थिति में 14 वस्तुओं के स्वप्न माता त्रिशला को आना। जन्म कल्याण अर्थात प्रभु के जन्म पर इंद्र ने मेरू पर्वत पर ले जाकर उनको स्नान अभिषेक कराया। दिक्षा कल्याण में दिक्षा के समय आयोजित महोत्सव, वर्षीदान आते है। केवल ज्ञान कल्याण व मोक्ष कल्याण का भी वृतांत कल्पसूत्र में है। 12 सितंबर को सुबह 9 बजे रुपचांद आराधना भवन में अष्ठमंगल के चढ़ावे बोले जाएंगे।

शरीर का अवसान होता है लेकिन व्यक्ति की चर्चा अवसान नहीं होती - सुभूषणमति माताजी ने बंडीजी के बाग में चल रही धर्मसभा में कहा कि शरीर का अवसान हो जाता है लेकिन व्यक्ति की चर्चा का कभी अवसान नहीं होता। श्रावक है तो साधुचर्या है। आचार्य शांतिसागर महाराज की विनयांजलि सभा में कहा कि आचार्य ने भगवान महावीर के नाम पर जैन धर्म को संगठित किया। जिनालय, जिनवाणी, चारित्र, मुनिव्रत एवं मुनिविहार की रक्षा की। चरित्र चक्रवर्ती ग्रंथ का स्वाध्याय एक बार अवश्य करें। सुआद्यमति माताजी ने कहा कि जिनका केवल आत्मा से वास्ता हो उन्हीं के लिए मोक्ष का रास्ता मिलता है। सभा में शिवानी दीदी एवं श्वेता दीदी ने भी विचार रखे। संचालन राकेश दोशी ने किया। आभार निर्मल मेहता ने माना।

रुपचांद आराधना भवन में प्रवचन में मोजूद संत व भक्त।

दीक्षा लेने में उम्र बाधक नहीं होती

साध्वी अपूर्वप्रज्ञामसा ने कहा कि अंतगढ सूत्र में 90 पुण्य आत्माओं का वर्णन है। जिन्होंने संयम धारण कर मोक्ष को पाया है। इन पुण्य आत्माओं में मनुष्य के साथ पशु-पक्षी व काया के जीव शामिल है। साध्वी ने कहा कि संयम लेने अर्थात दीक्षा लेने में आयु कभी बाधक नहीं होती है। कम आयु में भी जैन संयम लेने ग्रहण करते है वे दीर्घकाल में उत्कृष्ट साधना करते हुए अपने आत्मकल्याण के उद्देश्य को पूर्ण करते हुए मोक्ष मामी बन जाते है। एवंता मुनि ने मात्र 8 साल की उम्र में भगवान महावीर से दीक्षा ली। छोटे से बालमुनि एवंता जिसके दूध के दांत टूटना शुरू ही हुए थे कि उसने आपने माता-पिता के समक्ष महवीर के चरणों में जाने की इच्छा प्रकट की। पुत्र की उत्कृष्ट भावना देख माता-पिता ने भी आज्ञा दी। साध्वी ने कहा कि संयम दीक्षा लेने में उम्र कोई मायने नहीं रखती है। इसलिए कम आयु के संतों व साध्वियों को देख कर आश्चर्य व शंका करने की बजाय स्वयं संयम का मार्ग चुनेंगे तो बेहतर होगा।

रात को हुई पालनाजी की भक्ति

तलेरा विहार स्थित चिदपुण्य आराधना भवन के सामने पांडाल में सोमवार रात 8 से 10.30 बजे तक प्रभु के पालनाजी की भक्ति की गई। प्रसन्नसागर मसा व साध्वी अर्हमप्रिया की निश्रा में महोत्सव मनाया। पालनाजी के लाभार्थी परिवार अरविंदकुमार बापूलाल उकावत परिवार की और से तलेरा विहार में पालनाजी की भक्ति हुई। गायक देवेंद्र झालावाड़ वाले ने प्रभु भक्ति के कई गीत प्रस्तुत किए। भक्तों ने भगवान को झूला झूलाया।

ऋ षभदेव जिनालय पर विभिन्न धार्मिक आयोजन

नारायणगढ़ | जैन समाज के पर्युषण महापर्व के दौरान शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय एवं ऋषभदेव जिनालय पर विभिन्न धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। प्रतिदिन राजेंद्र जैन पौषधशाला एवं आत्मानंद जैन पौषधशाला प्रवचन हो रहे है। समाज के अमित मेहता, पवन छिंगावत, अंकुश हिंगड़, हेमंत मेहता, अंकित चौहान, आशीष चौहान सहित अन्य युवा दोनों जिनालयों में भगवान की मनमोहक अंगरचना कर रहे हैं। मंगलवार को श्री ऋषभदेव जिनालय में भक्ति संगीत हुआ।

‘पर्युषण पर्व मोक्ष रूपी पते में पहुंचने का सही माध्यम’

दलौदा |
यह जीवन एक अंतर्देशीय पत्र जैसा है जिसमें बचपन जवानी और बुढ़ापा जैसे 3 फोल्ड हैं। कब हमारा पत्र पैक हो जाएगा हमें मालूम ही नहीं है। अतः सम्यक ज्ञान सम्यक दर्शन और सम्यक चारित्र की ओर जीवन को मोड़े तो हमारा जीवन रूपी अंतरर्देशीय मोक्ष रूपी सही पते पर पहुंच जाएगा और इसके लिए पर्युषण पर्व एक माध्यम है जो सही दिशा देता है। यह बात साध्वी विजयश्रीजी मसा ने पर्युषण पर्व के पांचवें दिन भगवान महावीर स्वास्थ्य केंद्र परिसर में प्रवचन में कहीं। चंद्रेशमुनि मसा ने कहा हमारे विचार स्थिर नहीं है इसलिए हम विचलित होते रहते हैं। तपस्वियों को प्रत्याखान विजय मुनि मसा ने करवाएं। नम्रता वीरेंद्र जैन के 13 उपवास की तपस्या के उपलक्ष में विनीता श्रीजी मसा ने अनुमोदना गीत सुनाया। संचालन ललित जैन ने किया। प्रभावना अशोक शांतिलाल मोगरा परिवार की।

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