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चुनावी वर्ष को शासनाधीन कर्मचारी वह अवसर मानते हैं जिसमें

चुनावी वर्ष को शासनाधीन कर्मचारी वह अवसर मानते हैं जिसमें वे मांगंे शासकों से मनवा सकते हैं। दूसरी ओर राजनेताओं...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:55 AM IST
चुनावी वर्ष को शासनाधीन कर्मचारी वह अवसर मानते हैं जिसमें वे मांगंे शासकों से मनवा सकते हैं। दूसरी ओर राजनेताओं को भी वोटों की जरूरत होती है इसलिए वे भी चार वर्ष तक कर्मचारियों की सुनवाई न करते हुए अंतिम पांचवंे वर्ष में आंशिक मांगें मानकर यह जताने का प्रयास करते हैं कि वे कर्मचारियों के कितने बड़े हितैषी है। इस बीच मेहनतकशों की मूलभूत मांगों से ध्यान हटाने क लिए जातीय अस्मिता, धार्मिक पहचान, उस पर गर्व करने के नाम पर शक्ति प्रदर्शन भी जारी रहते हैं। ताकि कर्मचारियों की वर्गीय एकता को तोड़ा जा सके। बांटों और राज करो की ब्रिटिश साम्राज्यवादियों की नीति आजाद भारत में भी सफलतापूर्वक संचालित है। हरनामसिंह चंदवानी, मंदसौर

सत्तारूढ़ व कर्मचारी के लिए मौका है चुनावी वर्ष

नगर के प्रमुख मार्गों व शहर के भीतर पशुओं विचरण करते रहते है। इससे दुर्घटनाएं होती हैं। रात में बीमा कार्यालय के तिराहे से लेकर कृषि उपज मंडी गेट भुन्याखेड़ी मार्ग तक बिजली के पोल की व्यवस्था न होने के कारण गहन अंधेरा रहता है। मुख्य मार्ग पर कई बार जाम की स्थिति बनती है। ऐसी स्थिति को देखते हुए नपा या फिर बिजली विभाग को यहां प्रकाश की व्यवस्था करना चाहिए। मवेशियों को भी यहां से हटाए जाना चाहिए ताकि लोगों दुर्घटना का शिकार ना हो। - भगवती प्रसाद गेहलोद, मंदसौर

सड़कों पर जानवरों का घूमना हादसों का कारण

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वर्तमान में पर्यावरण से जुड़ी सभी समस्याओं में सबसे बड़ी चुनौती कार्बन फुट प्रिंट है। इसका कारण मानव द्वारा उपयोग किए गए संसाधन जीवाश्म ईधन, कागज, प्लास्टिक, इलेक्ट्रानिक, बिजली, पानी , अनाज में होने वाला कार्बन उत्सर्जन ही कार्बन फुट प्रिंट कहलाता है। वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करना बहुत जरूरी है। विश्व स्तर पर इस जीवाश्म ईंधन के अंधाधुंध इस्तेमाल को कम करने से कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। सभी को सार्वजनिक यातायात का उपयोग करना चाहिए, स्थानीय व रिसाइकिल्ड उत्पादकों का प्रयोग, स्थानीय चीजों का सेवन करके बिजली व पानी के अपव्यय को रोकना होगा। डॉ. प्रेरणा मित्रा मंदसौर

कार्बन उत्सर्जन को कम करना होगा