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ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने वाले इंजीनियर को 2 साल की कैद

बगैर गुणवत्ता की सड़क पर दिया था पूर्णता प्रमाण-पत्र कोर्ट ने ठेकेदारों को माना षड्यंत्र का आरोपी भास्कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:50 PM IST

बगैर गुणवत्ता की सड़क पर दिया था पूर्णता प्रमाण-पत्र

कोर्ट ने ठेकेदारों को माना षड्यंत्र का आरोपी

भास्कर संवाददाता | मंदसौर

सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ताहीन सड़क पर पूर्णता प्रमाण-पत्र देकर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के मामले में कोर्ट ने बुधवार को पीड्ब्ल्यूडी के तात्कालिक कार्यपालन यंत्री को दो साल की सजा सुनाई। इसी मामले में कोर्ट ने ठेकेदारों को षड्यंत्र का आरोपी मानते हुए दो-दाे साल की सजा भी सुनाई है। तीनों को अर्थदंड भी दिया है। सजा विशेष न्यायाधीश मधुसूदन मिश्र ने सुनाई।

एडीपीओ नीतेश कृष्णनन ने बताया उदारीकृत आर्थिक नीति के अंतर्गत निजी फर्म ने बीओटी के तहत मंदसौर के बाहर से बायपास मार्ग का ठेका प्रकाश एस्फाल्टिंग एंड टोल हाईवेज लिमिटेड महू को दिया। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर पुनीत पिता प्रकाशचंद्र एवं डायरेक्टर पुनीत पिता नितिन अग्रवाल थे। कंपनी को 14 किमी रोड बनाना था। रोड की अनुमानित लागत 5 करोड़ रुपए थी। जिसे ठेकेदार को वहन करना था। इसके अतिरिक्त एक बड़ा पुल, दो मध्यम पुल, तथा 10 छोटी पुलियाएं, पहुंच मार्ग का प्रोटेक्शन कार्य, टोल बूथ, बैरियर व बोर्ड, पौधाराेपण, तार फेंसिंग, ट्रक पार्किग, नाली निर्माण करना था। ठेकेदार को 6 अक्टूबर 1997 को वर्क अार्डर दिया। उसे वर्क आर्डर के 24 माह में काम पूरा करना था। दो साल में काम पूरा करने पर अगले 1551 दिन मार्ग से गुजरने वाले वाहनों से टैक्स लेने का अधिकार था। ठेकेदार ने तात्कालिक पीड्ब्ल्यूडी कार्यपालन यंत्री दिनकर कृष्ण पिता कृष्णराव राेकड़े से सांठगांठ कर आठ माह में कार्य पूर्णता का प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिया। एक गुमनाम शिकायत लोकायुक्त में हुई। इस आधार पर लोकायुक्त ने जांच कर तीनों के खिलाफ केस दर्ज किया। 2006 में चालान पेश किया। मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने कार्यपालन यंत्री रोकड़ को पद का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारों को आर्थिक लाभ पहुंचाने का दोषी माना और दो साल की कैद व दस हजार रुपए का जुर्माना किया। कोर्ट ने दोनों ठेकेदारों को भी षड्यंत्र का आरोपी मानते हुए दो दो साल की कैद व दस दस हजार रुपए जुर्माना किया। मामले में पैरवी उपसंचालक अभियोजन बीएस ठाकुर ने की। सहयोग एडीपीओ कृष्णनन ने किया।

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