11 करोड़ के नए कलेक्टोरेट भवन में 4 माह में लेंटर से गिरने लगा सीमेंट-कांक्रीट, पिलर से सरिये भी दिखने लगे / 11 करोड़ के नए कलेक्टोरेट भवन में 4 माह में लेंटर से गिरने लगा सीमेंट-कांक्रीट, पिलर से सरिये भी दिखने लगे

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 03:51 AM IST

Mandsour News - नए कलेक्टोरेट भवन के घटिया निर्माण की हकीकत चार महीने में ही सामने आ गई है। जिला प्रशासन ने यशनगर के समीप 11 करोड़...

Mandsour News - cement concrete started falling from the lancer in a new collectorate building of 11 crores in 4 months
नए कलेक्टोरेट भवन के घटिया निर्माण की हकीकत चार महीने में ही सामने आ गई है। जिला प्रशासन ने यशनगर के समीप 11 करोड़ रुपए से नया कलेक्टोरेट भवन तैयार कराया। इस दौरान गड़बड़ियों व घटिया निर्माण के आरोप लगे थे। जनप्रतिनिधियों ने जांच कराई जिसमें घटिया मटेरियल पाया लेकिन अधिकारियों ने यह कहते हुए रिपोर्ट को नकार दिया कि इन्हें जांच के अधिकार नहीं। अब भवन ही घटिया निर्माण की कहानी बयां कर रहा है। चार माह में भवन का कलर निकलने लगा व छत के लेंटर से सीमेंट-कांक्रीट गिर रहा है जिससे सरिए भी दिखने लगे। पानी की वजह से सरिये में जंग लग गया। जानकारों के अनुसार इन हालात के लिए डिजाइन के अनुसार सरिया नहीं डालना, क्यूरिंग सही नहीं होना या कांक्रीट की ग्रेडिंग में गड़बड़ी मुख्य कारण हो सकते हैं।

जिला प्रशासन द्वारा तैयार कराया नया कलेक्टोरेट भवन निर्माण प्रक्रिया के शुरू से ही विवादों में घिरा रहा। पहले शहर के बाहर रसूखदारों की जमीनों को लाभ पहुंचाने के लिए कलेक्टोरेट को भी बाहर ले जाने के आरोप लगे। इसके बाद डूब की जमीन पर कलेक्टोरेट बनाने का मामला सामने आया। निर्माण शुरू हुआ तो घटिया निर्माण के आरोप लगे। मामले में जिपं सदस्य अंशुल बैरागी व अन्य जनप्रतिनिधियों ने निर्माण सामग्री की जांच कराई जिसमें सामग्री घटिया पाई गई। अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट को भी यह कहते हुए नकार दिया कि जनप्रतिनिधियों को कोई अधिकार नहीं। सभी आरोपों को अनदेखा कर कलेक्टर ने जल्द नए भवन को तैयार कराया और जुलाई के अंतिम सप्ताह में 326 कमरे विभागों को आवंटित किए व तत्काल सभी विभागों को शिफ्ट कराया। भवन में शिफ्ट हुए चार माह भी नहीं हुए और घटिया निर्माण सामने आने लगा है। जिम्मेदार अभी भी किसी भी तरह की गड़बड़ी को नकारते हुए मामूली बात बता रहे हैं।

कलेक्टोरेट की पोल

पानी रिसाव से सरियों में लगी जंग, भवन की मजबूती पर होगा असर

मामले में लोक निर्माण के पूर्व कार्यपालन यंत्री ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि चार माह में ऐसी स्थिति तो बनना नहीं चाहिए। छतों से पानी रिस रहा है तो उसे तुरंत बंद कराना चाहिए। नहीं तो भवन को भारी नुकसान होगा। लेंटर से सीमेंट-कांक्रीट गिरने के तीन कारण हो सकते है। लेंटर में सरिया डिजाइन के मान से कम डालने पर वह लोड नहीं ले पाता जिससे इस तरह की स्थिति बनती है। निर्माण के बाद क्यूरिंग (पानी की तरी) सही नहीं होने से सीमेंट खराब हो जाती है। इससे भी सीमेंट-कांक्रीट गिरता है एवं ग्रेडिंग में गड़बड़ी से भी यह स्थिति बनती है। कार्यपालन यंत्री ने बताया कि यदि सरिये में जंग लग गया है तो उसे तुरंत सही कराया जाना चाहिए नहीं तो सरिये का डायमीटर काम होने लगेगा और वह भवन का लोड नहीं ले पाएगा। इससे भवन की लाइफ आधी रह जाएगी।

पीआरओ कक्ष के पास छत में पानी रिसने के कारण सरिये के उपर का सीमेंट-कांक्रीट गिर गया व सरिये दिखने लगे हैं।

कई जगह निकल रहे सरिये




ठेकेदार को नोटिस जारी करेंगे


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