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दो साल में 8.72 फीट गिरा भूजल स्तर, हर साल 300 से अधिक नलकूप तोड़ रहे दम

शहर सहित जिलेभर में हर साल भूजल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जल स्तर में दो साल में 8 फीट से भी...

Danik Bhaskar

May 01, 2018, 03:35 AM IST
शहर सहित जिलेभर में हर साल भूजल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जल स्तर में दो साल में 8 फीट से भी अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। जिम्मेदार जल स्तर बढ़ाने के नाम पर नालों पर बोरी बंधान, तालाबों के निर्माण पर अरबों रुपए खर्च कर रहे हैं लेकिन ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। इससे जिलेभर में जलसंकट की स्थिति बन रही है। हर साल 300 से अधिक नलकूप दम तोड़ रहे हैं। वाटर हार्वेस्टिंग जैसे सिस्टम पर ना प्रशासन ध्यान दे रहा ना नगरपालिका।

गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर सहित जिले में पेयजल संकट की स्थिति बनने लगी है। तेज धूप से नदियों व तालाबों का पानी भाप बनकर उड़ रहा है तो लोग जमीन के पानी का निरंतर दोहन कर रहे हैं। यही कारण है कि जिले में दो साल में दो मीटर से अधिक भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। मंदसौर ब्लॉक में सर्वाधिक गिरवट हुई है। कहने को तो मंदसौर में शिवना नदी, तेलिया तालाब, नाहर सैयद तालाब, जनता कॉलोनी की तलैया सहित कई जलस्रोत हैं लेकिन ये अतिक्रमण का शिकार हो रहे है जिससे इनकी जलग्रहण क्षमता कम हो रही है। वर्तमान में मंदसौर के आसपास ईसबखेड़ी, रानीखेड़ी, भोलिया, भाट पिपल्या, लामगरी जैसे अनेक गावों में लाेगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ईसबखेड़ी के सभी जलस्रोत सूख गए हैं सिर्फ एक नलकूप है जो 15 मिनट चलता है। रानीखेड़ी में ग्रामीणों को दो से तीन किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा। यही हाल जिलेभर में हैं लेकिन जिम्मेदार जलसंग्रहण की तरफ ध्यान नहीं दे रहे।

बाहरी कॉलोनी के लोगों को तो अभी से करना पड़ रही जद्दोजहद

लोगों को अंचल में व मंदसौर शहर में इस तरह पानी के लिए लाइनें लगाना पड़ रहीं।

दो साल पहले दिए ये निर्देश- भूजल स्तर में तेजी से वृद्धि करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। हर साल शासन द्वारा डार्क जोन घोषित किए जाने के बाद कलेक्टर विभागों को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने व अन्य प्रयास के लिए निर्देश देते है पर हो कुछ नहीं रहा। दो साल पहले तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्रकुमार सिंह ने सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन हालात यह हंै कि जल संसाधन, जिला पंचायत, नगर पालिका जैसे कार्यालयों में ही वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लग पाए हैं।

इधर, जिम्मेदार योजना बनाने व काम कराने की बात कह रहे

जलप्रबंधन के लिए कार्ययोजना तैयार कर कार्रवाई करेंगे


विभागों को निर्देश दिए जाएंगे


जलस्तर फीट में

ब्लॉक 2016 2018

मंदसौर 41.19 32.47

सीतामऊ 34.66 31.06

गरोठ 36.73 29.71

भानपुरा 28.86 26.24

मल्हारगढ़ 34.87 29.84

ऐसे बंद हो रहे नलकूप

जिले की 440 ग्राम पंचायतों में वर्तमान में 8221 नलकूप हैं। इसमें इस साल 900 से अधिक ने दम तोड़ दिया। इसमें 300 खनन ऐसे हैं जो पूरी तरह से बंद हो गए हैं। इनकी जगह पीएचई द्वारा वर्ष 2018-19 में 271 नए नलकूप खनन किए जाएंगे। इसी तरह हर साल पीएचई द्वारा नए नलकूप खनन किए जाते हैं व 300 करीब नलकूप बंद हो रहे हैं।

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