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शासन ने दो साल की राशि नहीं दी तो आरटीई के तहत नहीं पढ़ाएंगे

मप्र शासन ने आरटीई में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नियम सख्त किए तो अशासकीय स्कूल संचालकों को रास नहीं आ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:00 AM IST

शासन ने दो साल की राशि नहीं दी तो आरटीई के तहत नहीं पढ़ाएंगे
मप्र शासन ने आरटीई में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नियम सख्त किए तो अशासकीय स्कूल संचालकों को रास नहीं आ रहे हैं। निजी स्कूल संचालकों ने आरटीई में प्रवेशित बच्चों की दो साल की राशि शर्ताें के साथ जल्द देने की मांग करते हुए गांधी चौराहा पर विरोध-प्रदर्शन किया। जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंप आगे की रणनीति पर चर्चा कर बैठक की। इसमें निजी स्कूल के संचालकों ने दोनों साल की बकाया राशि नहीं देने पर जुलाई से आरटीई में प्रवेशित बच्चों को नहीं पढ़ाने का निर्णय लिया।

आरटीई में हो रही व होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए शासन ने इसकी प्रक्रिया में कई बदलाव किए। शासन ने 2016-17 में प्रवेशित बच्चों का बायोमेट्रिक सत्यापन कराने व इनकी उपस्थिति बायोमेट्रिक से लेने की अनिवार्यता की। इससे निजी स्कूल संचालक पूरा नहीं कर पा रहे हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराए जाने पर जिले में दो साल से निजी स्कूल संचालकों का करीब चार करोड़ का भुगतान अटका है। 2016-17 में अध्ययनरत बच्चों का भी सत्यापन कराना है जिसके बाद ही उस वर्ष की राशि शासन द्वारा जारी कि जाएगी। 2017-18 में प्रवेशित बच्चों का भी स्कूल संचालकों काे कोई भुगतान नहीं किया। इससे संचालकों में आक्रोश है। उन्होंने सोमवार को गांधी चौराहा पर नारेबाजी कर विरोध-प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला शिक्षा कार्यालय पहुंच आर.एल. कारपेंटर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें नियमों में शिथिलता लाते हुए दो साल की बकाया राशि को पुराने नियमों के अनुसार देने की मांग की। इसके बाद संचालकों की बैठक हुई।

नाराजी

अशासकीय स्कूल संचालकों ने शर्ताें के साथ जल्द राशि देने की मांग करते हुए गांधी चौराहे पर विरोध-प्रदर्शन किया, जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

दो साल का चार से पांच करोड़ रुपए बकाया

विरोध-प्रदर्शन व ज्ञापन के बाद निजी स्कूल संचालकों ने रणनीति पर चर्चा की गई। जिला अशासकीय विद्यालय संगठन अध्यक्ष रूपेश पारिख ने बताया कि बैठक में सभी ने निर्णय लिया की यदि शासन द्वारा मांगों को नहीं माना जाता है, दो साल की बकाया राशि नहीं दी जाती है तो जुलाई से शुरू होने वाले सत्र से आरटीई में प्रवेश लेने वाले बच्चों को नहीं पढ़ाया जाएगा। स्कूल आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में दो साल की राशि नहीं मिलने से सभी परेशान हैं। रूपेश ने बताया कि जिले में करीब स्कूल संचालकों को दो साल का चार से पांच करोड़ रुपए बकाया है।

निजी स्कूलों के संचालकों ने शर्तों के साथ राशि देने की मांग को लेकर गांधी चौराहे पर प्रदर्शन किया।

ये हैं मांगें

अन्य राज्यों की तुलना में शुल्क की राशि प्रदेश में कम है जिसे बढ़ाया जाए। सत्र 2016-17 एवं 2017-18 की फीस प्रतिपूर्ति इसी सत्र में पुरानी प्रक्रिया से की जाए। जिस सत्र में प्रवेश दिया जाए उसकी फीस उसी सत्र में दी जाए। बायोमेट्रिक पद्धति को सत्र 2018-19 से लागू किया जाए।

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